नई दिल्ली, न्यूज वर्ल्ड डेस्क। दुनिया के कई देश कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन की मार झेल रहे हैं। इस नए वेरिएंट के कारण कोरोना वायरस तेज़ी से बढ़ते जा रहा है। अब इस बढ़ते हुए मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए कोरोना वैक्सीन कि बूस्टर डोज पर काम किया जा रहा है। इस बीच World Health Organization (WHO) की टॉप साइंटिस्ट डॉ सौम्या विश्वनाथन ने बताया कि, फिलहाल इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि बच्चों और किशोरों को वैक्सीन कि बूस्टर डोज देने की जरूरत होगी। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर उन्होंने बताया कि, यह जरूरी नहीं है कि हर वेरिएंट को ध्यान में रखते हुए वैक्सीन में किसी भी तरह का बदलाव किया जाए।
बुधवार यानी 19 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस के वक्त डॉ सौम्या विश्वनाथन ने बताया कि, फिलहाल इस इस बात कोई साक्ष्य नहीं है कि स्वस्थ बच्चों और किशोरों को कोरोना कि वैक्सीन के बूस्टर डोज की जरूरत पढ़ेगी। World Health Organization की शीर्ष डॉक्टर का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका, इजरायल, जर्मनी जैसे देशों ने बच्चों को कोरोना की बूस्टर डोज देने कि शुरुआत करदी है।
भारत में इस महीने यानी जनवरी 2022 से है 15 से 18 वर्ष के किशोरों को वैक्सीन लगाने की शुरुआत की गई है। तो वहीं अमेरिका में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 12 से लेकर15 वर्ष के बच्चों और किशोरों के लिए फाइजर और बायोएनटेक की कोरोना वैक्सीन को बूस्टर डोज के तौर पर यू करने की मंजूरी दे दी है।
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