
दिल्ली की राजनीति में 27 साल बाद बड़ा बदलाव आया है। चार घंटे की मतगणना के बाद चुनाव आयोग के आंकड़ों में भाजपा को 70 में से 48 सीटों पर बढ़त मिली है, जबकि AAP सिर्फ 22 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।
केजरीवाल-सिसोदिया चुनाव हारे, आतिशी जीतीं
इस ऐतिहासिक बदलाव में AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली सीट से हार का सामना करना पड़ा, जबकि मनीष सिसोदिया भी जंगपुरा से चुनाव हार गए। हालांकि, AAP की आतिशी अपनी सीट बचाने में सफल रहीं।
वहीं, AAP के दिग्गज नेता सत्येंद्र जैन, सोमनाथ भारती, सौरभ भारद्वाज, अमानतुल्लाह खान और अवध ओझा भी पीछे चल रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को 3,182 वोटों से हराया और जीत के बाद गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे।
भाजपा के वोट शेयर में 9% का उछाल, AAP को 10% नुकसान
भाजपा ने 2020 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले वोट शेयर में 9% की बढ़ोतरी दर्ज की है। वहीं, AAP को 10% का सीधा नुकसान हुआ है। हालांकि, कांग्रेस को सीट नहीं मिल रही, लेकिन उसने वोट शेयर में 2% की मामूली बढ़त हासिल की है। भाजपा की 40 सीटें बढ़ीं, AAP को बड़ा नुकसान
2020 में AAP को 62 सीटें मिली थीं, जो अब घटकर 22 रह गई हैं। वहीं, भाजपा ने पिछली बार की तुलना में अपनी 40 सीटें बढ़ाकर 48 तक पहुंचा दी हैं। कांग्रेस इस बार भी एक भी सीट जीतने में नाकाम रही।
दिल्ली में नया राजनीतिक अध्याय शुरू?
27 साल बाद भाजपा की सत्ता में वापसी के संकेत साफ हैं। क्या यह दिल्ली की राजनीति में स्थायी बदलाव लाएगा, या AAP वापसी की तैयारी में जुटेगी?
अब सभी की निगाहें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

