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दिल्ली इंटरनेट बंदी मामले में केंद्र की सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी, CJP प्रदर्शन पर लगी पाबंदियों की सुनवाई जारी

15 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
दिल्ली इंटरनेट बंदी मामले में केंद्र की सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी, CJP प्रदर्शन पर लगी पाबंदियों की सुनवाई जारी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियां अब सुप्रीम कोर्ट में कानूनी सवालों के घेरे में हैं। केंद्र सरकार ने इंटरनेट सेवा बाधित करने के मामले में शीर्ष अदालत से बिना शर्त माफी मांगी है।


गृह सचिव गोविंद मोहन ने अपने हलफनामे में कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया था। दूसरी तरफ, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने स्पष्ट किया कि पूरी मेट्रो सेवा बंद नहीं की गई थी, बल्कि 45 स्टेशनों पर यात्रियों की आवाजाही रोकी गई थी।


सुप्रीम कोर्ट में पाबंदियों को लेकर दो याचिकाएं

CJP के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में इंटरनेट, सार्वजनिक परिवहन और लोगों की आवाजाही पर लगी रोक को चुनौती देते हुए दो याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो और दिल्ली आने वाली ट्रेनों का संचालन पूरी तरह रोकने से मना किया था।


इसके बावजूद 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दिन कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। इस मामले में 11 अक्टूबर को अदालत ने नाराजगी जाहिर की और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा।


कोर्ट ने सामान्य सेवाएं जारी रखने पर दिया था जोर

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, इंटरनेट बाधित नहीं होना चाहिए और आम लोगों की आवाजाही पर रोक नहीं लगनी चाहिए। मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की। अदालत में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े, शोएब आलम और शादान फरासत ने पैरवी की।


DMRC ने बताया, पूरी मेट्रो सेवा नहीं हुई थी बंद

मेट्रो संचालन को लेकर उठे सवालों पर DMRC ने कहा कि 10 अक्टूबर को सभी स्टेशनों को बंद नहीं किया गया था। प्रतिबंध केवल 45 स्टेशनों पर यात्रियों की आवाजाही तक सीमित थे। मेट्रो सेवाओं पर लगी इन पाबंदियों को लेकर ही अदालत में सवाल उठे थे। याचिकाकर्ताओं ने इसे सुप्रीम कोर्ट के पहले के निर्देशों के उल्लंघन से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की।


जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली

कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने की घोषणा की थी। पार्टी का विरोध SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ था। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई थी।


दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। इसके बाद राजधानी में कड़ी बैरिकेडिंग की गई, कुछ मेट्रो स्टेशनों पर आवाजाही रोकी गई और इंटरनेट सेवाएं बाधित की गईं। पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों को हिरासत में भी लिया।


CJP के तीन प्रमुख नेता 23 घंटे हिरासत में रहे

प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे CJP के शीर्ष नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान से ही हिरासत में ले लिया गया था।


मजिस्ट्रेट कोर्ट ने रविवार सुबह करीब 10 बजे तीनों को रिहा करने का आदेश दिया। रिहाई से पहले वे लगभग 23 घंटे पुलिस हिरासत में रहे।


केजरीवाल, ममता बनर्जी समेत हजारों लोगों को हिरासत में लेने का दावा


प्रदर्शन के दौरान अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई।


घटनाक्रम के दौरान दिल्ली में दो स्थानों पर पथराव हुआ। इसमें पुलिस के 7 जवान घायल हो गए।


अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें

इंटरनेट सेवा रोकने और मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने के फैसलों को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को अदालत के सवालों का जवाब देना है। सरकार ने कानून-व्यवस्था और अफवाहों की आशंका को अपने कदम की वजह बताया है।


इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा कि प्रदर्शन के समय सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप थे या नहीं।

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