
नई दिल्ली। भारत में E-20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने ऊपर लगे हितों के टकराव और निजी लाभ के आरोपों का सार्वजनिक रूप से जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे कई दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
एक विशेष साक्षात्कार में गडकरी ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल कारोबार में उनके परिवार का कोई बड़ा आर्थिक हित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में उनके बेटों की हिस्सेदारी बेहद सीमित है और व्यवसाय पर फिलहाल 1,600 करोड़ रुपये का कर्ज है।
राजनीतिक आरोपों को बताया निराधार
गडकरी ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। उनके अनुसार सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाकर भ्रम पैदा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका इस कारोबार की खरीद-बिक्री से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और निजी लाभ लेने के आरोप तथ्यहीन हैं।
नई नहीं है इथेनॉल मिश्रण की नीति
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति उनकी पहल नहीं है। उन्होंने कहा की, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय से इस नीति को समर्थन मिला। यूपीए सरकार ने भी इसे आगे बढ़ाया। तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने भी संसद में इसके पक्ष में अपनी बात रखी थी।
कई वैकल्पिक ईंधनों के समर्थन की बात
गडकरी ने कहा कि उन्होंने केवल गन्ने से बनने वाले इथेनॉल ही नहीं, बल्कि:
मक्का से तैयार इथेनॉल
फसल अवशेष (पराली) आधारित इथेनॉल
बांस से बनने वाला इथेनॉल
मेथनॉल
हाइड्रोजन
इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
जैसे विकल्पों का भी लगातार समर्थन किया है। उनका कहना है कि इन विकल्पों का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना है।
इंजन खराब होने के दावों पर क्या बोले?
वाहनों के इंजन खराब होने और माइलेज घटने के दावों पर गडकरी ने कहा कि हाईवे पर ईंधन दक्षता में कुछ अंतर महसूस हो सकता है, लेकिन इंजन को नुकसान पहुंचने का दावा सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की प्रमुख वाहन निर्माता मारुति को भी अपनी गाड़ियों के इंजनों पर इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का कोई प्रतिकूल प्रभाव दिखाई नहीं दिया है।
वैकल्पिक ईंधन पर समर्थन रहेगा जारी
गडकरी ने कहा कि गलत सूचनाओं का उपयोग उनके और केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। इसके बावजूद प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च को घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने की नीति जारी रहेगी।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

