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डेस्क रिपोर्टर
नई दिल्ली, न्यूज वर्ल्ड डिस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार यानी 1 फरवरी को अपना चौथा बजट पेश किया। बजट पेश करते वक्त निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में राजनीति से हाथभर की दूरी बनाकर रखी और ऐसा तब किया जब महज 9 दिन बाद, 10 फरवरी से 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कि प्रक्रिया आरंभ होने वाली है और जहां चुनाव हो रहे है वो राज्य भी कोई मामूली नहीं हैं। बल्कि इनमें से एक तो उत्तर प्रदेश है, जिसकी सियासत पूरे देश को साल भर प्रभावित करती रही है। इसके अलावा उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में चुनाव होने हैं।
इन सब के बावजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगभग 90 मिनट का अपना बजट भाषण दिया जिसमें उन्होंने एक बार भी ऐसा संकेत नहीं दिया कि बजट चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। पर यह मानना और कहना दोनों ही मुश्किल है कि बजट में चुनाव और राजनीति को ध्यान में नहीं रखा होगा। तो फिर अब सवाल ये उठता है कि निर्मला सीतारमण कैसे अपने बजट भाषण में इस अहम हिस्से को पीछे रखने में सफल हुई?
परियोजनाओं और आंकड़ों का हुआ जिक्र पर जगहों का नहीं!
बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमरण ने अपने भाषण में बड़ी ही चालाकी से राजनीती मुद्दे को साइड में रख कर हर मुद्दे पर बात रखी। उन्होंने बिजली, पानी, सड़क, शौचालय, घरेलू गैस आदि के आंकड़े गिनाए। इसके साथ ही उन्होंने नई परियोजनाओं की भी घोषणा की। पर कहीं भी किसी स्थान और विशेष का जिक्र नहीं किया। जैसे केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना ( ये मध्य प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश से भी जुड़ी हुई है)। इसके साथ ही राजनीति और सूखा से प्रभावित बुंदेलखंड के इलाके। यह पर परिेयोजना 44,605 करोड़ रुपए की थी, जिसके लिए बजट में 14,000 करोड़ रुपए की मंजूरी भी दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमरण ने इसका ऐलान करते वक्त उत्तर प्रदेश का नाम लिए बिना इसके कई फायदे गिना दिए। ठीक ऐसा उन्होंने बाकी के मामलों में भी करने की कोशिश की थी।
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