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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन, राज्य में 3 दिन का राजकीय शोक

04 अग, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन, राज्य में 3 दिन का राजकीय शोक

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन, राज्य में 3 दिन का राजकीय शोक

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली/रांची। झारखंड की राजनीति के पितामह और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक शिबू सोरेन अब इस दुनिया में नहीं रहे। 81 वर्षीय दिशोम गुरुजी ने सोमवार सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे पिछले डेढ़ महीने से भर्ती थे और एक महीने से वेंटिलेटर पर थे। शिबू सोरेन के निधन की खबर के साथ ही पूरे झारखंड और देश में शोक की लहर दौड़ गई है।


ब्रेन स्ट्रोक के बाद बिगड़ी थी तबीयत

शिबू सोरेन को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिससे उनके शरीर के बाईं ओर पैरालिसिस हो गया था। किडनी की बीमारी, डायलिसिस पर निर्भरता, डायबिटीज और बायपास सर्जरी के चलते उनकी हालत लगातार बिगड़ती रही। न्यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट की विशेष टीम उनका इलाज कर रही थी, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।


झारखंड में 3 दिन का राजकीय शोक

झारखंड सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। उनका पार्थिव शरीर आज शाम रांची लाया जाएगा, जहां अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। JMM प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया मंगलवार को की जाएगी।


राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और तमाम नेताओं ने जताया शोक

➡️ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल पहुंचकर पूर्व सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की।

➡️ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी परिवार से मिलने अस्पताल पहुंचीं।

➡️ RJD नेताओं मीसा भारती, मनोज झा सहित कई विपक्षी नेता भी अस्पताल पहुंचे।


राजनीतिक सफर: संघर्ष, सत्ता और समाज

➡️ शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक संरक्षक रहे।

➡️ तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे।

➡️ यूपीए-1 सरकार में कोयला मंत्री बने, लेकिन चिरूडीह हत्याकांड में नाम आने पर इस्तीफा देना पड़ा।

➡️ उन्हें आदिवासी समाज "दिशोम गुरुजी" के नाम से सम्मान देता रहा।


जनता के नेता, धरती के सपूत

शिबू सोरेन का जीवन आदिवासी अधिकारों की लड़ाई, खनिज संपदा पर स्वामित्व, स्थानीयता बनाम बाहरी और झारखंड राज्य निर्माण की कहानी है। उन्होंने झारखंड की आत्मा को राजनीतिक पहचान दिलाई और नई पीढ़ी को नेतृत्व सौंपकर खुद पीछे हट गए।

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