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हनुमान जयंती पर गौतम अदाणी ने परिवार संग अयोध्या राम मंदिर में किए दर्शन, 89 साल पुराने गुरुकुल को मिलेगी AI लैब

02 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
हनुमान जयंती पर गौतम अदाणी ने परिवार संग अयोध्या राम मंदिर में किए दर्शन, 89 साल पुराने गुरुकुल को मिलेगी AI लैब
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

हनुमान जयंती के पावन अवसर पर देश के जाने-माने उद्योगपति गौतम अदाणी अपने पूरे परिवार के साथ अयोध्या पहुंचे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने एक ऐसे गुरुकुल का दौरा किया जहां 200 छात्र बिना एक पैसा दिए वैदिक शिक्षा ले रहे हैं — और अब इस ऐतिहासिक संस्थान को मिलने वाली है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब।


परिवार संग पहुंचे राम दरबार — भावुक हुए अदाणी

गौतम अदाणी अपनी पत्नी डॉ. प्रीति अदाणी, बड़े बेटे करण अदाणी और बहू परिधि अदाणी के साथ अयोध्या आए। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद भावुक करने वाला रहा। उनके शब्दों में — यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और बढ़ते आत्मविश्वास का जीता-जागता प्रतीक है। भगवान श्रीराम के आदर्शों — सच्चाई, कर्तव्य और सेवा — को उन्होंने पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।


1935 का गुरुकुल — जहां गांधी और सुभाष भी आ चुके हैं

मंदिर दर्शन के बाद गौतम अदाणी महज 10 मिनट की दूरी पर स्थित श्री निश्शुल्क गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचे। स्वामी त्यागानंद जी द्वारा 1935 में स्थापित यह संस्थान आर्य समाज की वैदिक परंपरा पर टिका है। इस गुरुकुल की विशेषता यह है कि यहां शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क है। छात्र परिसर में रहकर, आचार्यों के सान्निध्य में पढ़ते हैं — किताबें भी, संस्कार भी। इतिहास के पन्नों में यह संस्थान इसलिए भी दर्ज है क्योंकि यहां महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान विभूतियां भी पधार चुकी हैं।


संस्कृत के श्लोकों से गूंज उठा परिसर

जब 200 विद्यार्थियों ने एक साथ संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण किया, तो पूरा परिसर एक अलग ऊर्जा से भर गया। गौतम अदाणी छात्रों के बीच बैठकर मंत्रोच्चार सुनते रहे और शिक्षकों से बातचीत करते रहे। परिसर में एक गौशाला भी है जहां 50 से 60 गायें हैं — यह गुरुकुल की जीवनशैली का हिस्सा है जो सिखाती है कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का जरिया नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।


परंपरा और तकनीक का संगम — आएगी AI लैब

इस दौरे का सबसे अहम ऐलान रहा — अदाणी फाउंडेशन इस गुरुकुल को सहयोग देगी और यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित लैब स्थापित करने में मदद करेगी। गौतम अदाणी ने कहा, *"जब शिक्षा मूल्यों के साथ जुड़ती है, तो वह सिर्फ इंसान नहीं, देश का भविष्य बनाती है।"* उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस तेज़ी से दुनिया AI की ओर बढ़ रही है, उस दौर में भारत की ज्ञान परंपरा को बचाना और मजबूत करना उतना ही ज़रूरी है।


'सेवा ही साधना है' — अदाणी की सोच

यह पहली बार नहीं है जब गौतम अदाणी किसी धार्मिक या सांस्कृतिक स्थल से जुड़े हों। इससे पहले वे प्रयागराज महाकुंभ में शामिल हुए थे और पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा में भी भाग लिया था। इंडोलॉजी यानी भारत अध्ययन को आगे बढ़ाने वाली पहलों का समर्थन भी वे करते रहे हैं। उनका मानना है — "सेवा ही साधना है।" यह दौरा उसी सोच की एक और कड़ी था, जहां परंपरा, आस्था और भविष्य की तैयारी एक साथ चलती है।

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