
नई दिल्ली। ‘भारत के विद्युत वाहनों की वैश्विक मांग बढ़ी है। अब निर्यात को नई ऊंचाई देने का समय है। भारत अब केवल ‘भारत में बनाओ’ नहीं बल्कि ‘भारत में निर्मित और विश्व के लिए निर्मित’ की दिशा में बढ़ रहा है। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय विद्युत वाहन संघ (IFEVA) के अध्यक्ष डॉ. राजीव मिश्रा का।
डॉ. मिश्रा का कहना है कि भारत का विद्युत वाहन उद्योग अब घरेलू बाजार से आगे बढ़कर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारत से विद्युत कारों का निर्यात लगभग 369 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यह भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता, तकनीकी दक्षता और वैश्विक बाजार में भारतीय विद्युत वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण संकेत है।
डॉ. राजीव मिश्रा ने इस उपलब्धि को भारत के विद्युत गतिशीलता क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनका कहना है कि अब भारत को केवल विद्युत वाहनों का बड़ा उपभोक्ता बाजार बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विश्व का प्रमुख विद्युत वाहन विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, नवाचार और निर्यात केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए।
अगला लक्ष्य प्रति तिमाही 1 अरब अमेरिकी डॉलर का विद्युत वाहन निर्यात
डॉ. राजीव मिश्रा ने भारत के लिए प्रति तिमाही 1 अरब अमेरिकी डॉलर के विद्युत वाहन निर्यात को अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया। इसके लिए विद्युत वाहन एवं बैटरी विनिर्माण का विस्तार, वाहन कलपुर्जों का अधिकतम स्थानीय उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा, विश्वस्तरीय परीक्षण एवं प्रमाणन व्यवस्था, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारतीय कंपनियों की भागीदारी, कुशल मानव संसाधन का विकास, चार्जिंग एवं बैटरी आधारभूत संरचना का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक साझेदारियों पर विशेष ध्यान देना होगा।
विद्युत वाहन उद्योग बनेगा रोजगार और आर्थिक विकास का नया आधार
डॉ. मिश्रा के मुताबिक विद्युत वाहन उद्योग के विस्तार से वाहन विनिर्माण, बैटरी, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सॉफ्टवेयर, चार्जिंग व्यवस्था, अनुसंधान, परिवहन तथा सेवा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही विद्युत वाहन निर्यात भारत के लिए विदेशी मुद्रा अर्जन, औद्योगिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि विद्युत गतिशीलता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक शक्ति और विकसित भारत 2047 के संकल्प को गति देने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
IFEVA मजबूत सेतु बनाने के लिए निरंतर कार्य करेगा
डॉ. राजीव मिश्रा ने कहा कि IFEVA सरकार, उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों, नवोदित उद्यमों, शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान संगठनों तथा वैश्विक निवेशकों के बीच सहयोग का मजबूत सेतु बनाने के लिए निरंतर कार्य करेगा। भारत के सामने अवसर केवल अधिक विद्युत वाहन बनाने का नहीं है। वास्तविक अवसर भारत को विश्व के सबसे विश्वसनीय विद्युत गतिशीलता नवाचार, विनिर्माण और निर्यात केंद्रों में स्थापित करने का है।
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