
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से पहले 14 जनवरी से राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू करने जा रहे हैं।15 राज्यों से गुजरने वाली राहुल की इस यात्रा के रूट में लोकसभा की कुल 357 सीटें हैं। कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनाव में इनमें से केवल 14 सीटें ही मिली थी।
राहुल गाधी की न्याय यात्रा को लेकर कांग्रेस काफी आशान्वित है कांग्रेस का मानना है कि राहुल की ये यात्रा मोदी के विजय रथ को रोकेगी, कांग्रेसी राहुल की पिछली भारत जोड़ो यात्रा को सुपरहिट मानती रही है। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में जीत का श्रेय भी पार्टी ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को ही दिया था। हालांकि, एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में करारी शिकस्त के बाद भारत जोड़ो यात्रा की चमक फीकी पड़ गई थी। उस यात्रा से कांग्रेस को सियासी फायदा हुआ या नहीं पर राहुल गांधी की छवि जरूर एक परिपक्व और जुझारू नेता की उभर कर सामने आई।
लोकसभा चुनाव में बहुत कम दिन ही बचे हैं, 15 राज्यों से गुजरने वाली यात्रा से क्या राहुल गांधी कोई करिश्मा कर पाएंगे, इन राज्यों में कांग्रेस की स्थिति क्या है, पिछले चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन क्या था, एक नजर डालते हैं।
राहुल गांधी की यात्रा 15 राज्यों से होकर गुजरेगी।
यात्रा 110 जिलों और करीब 100 लोकसभा सीटों से होकर गुजरेगी।
यात्रा के रूट में 15 राज्य हैं उनमें लोकसभा की कुल 357 सीटें हैं।
2019 लोकसभा चुनाव में 357 सीटों में से कांग्रेस के खाते में महज 14 सीटें
भारत जोड़ो न्याय यात्रा वाले राज्यों में से 5 में 2019 में कांग्रेस खाता तक नहीं खोल पाई थी।
मणिपुर, नगालैंड, अरुणाचल, राजस्थान और गुजरात में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला
7 राज्यों में कांग्रेस पिछली बार महज 1 सीट पर सिमट गई थी।
यूपी के अलावा बाकी 6 राज्य हैं मेघालय, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में केवल एक सीट
कांग्रेस को सबसे ज्यादा 3 सीटें असम में ही मिली थी।
बंगाल और छत्तीसगढ़ में उसने 2-2 सीटों पर जीत दर्ज की थी
यात्रा के रूट पर आनेवाली 357 सीटों में से 239 पर बीजेपी का कब्जा है
2 राज्यों में बीजेपी का नहीं खुला था खाता, 3 में क्लीन स्वीप
राहुल गांधी की यात्रा वाले 2 राज्य नगालैंड और मेघालय में 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी का खाता तक नहीं खुला था ।
राजस्थान, गुजरात और अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस को एक भी सीटे नहीं मिली थी।
2014 में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद राज्यों के चुनावों में भी कांग्रेस को हार पर हार का सामना करना पड़ा । बीच-बीच में कुछ राज्यों में जीत से पार्टी उत्साहित होती रही है, जैसे पिछले साल कांग्रेस ने कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश से बीजेपी को सत्ता से बाहर किया लेकिन साल बीतते-बीतते उसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे हिंदी पट्टी के 3 अहम राज्यों में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 2014 के शानदार प्रदर्शन को और बेहतर ही किया। 2014 और उसके बाद बीजेपी की जबरदस्त चुनावी जीतों में सबसे बड़ा फैक्टर जो रहा है वो है नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता।
पिछले सालों में मोदी जीत का पर्याय बन गये हैं,मोदी है तो मुमकिन है जैसे स्लोगन आम आदमी की जुबान पर हैं। ऐसे में राहुल गांधी की 2024 लोकसभा चुनाव से पहले भारत जोड़ो न्याय यात्रा कितना असर दिखाएगी और मोदी मैजिक को कितना रोक पाएगी ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आने वाले वक्त में मिलेगा।
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