
वाराणासी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है की उन्होने हिंदू-मुस्लिम की राजनीती में नहीं फसने का संकल्प लिया है, साथ ही कहा की जिस दिन उन्होंने इसका सहारा लिया उस दिन वें सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रह जाएंगे। उन्होने यह भी कहा की गाधरा कांड के बाद जानबुझ कर उनकी छवी खराब की गई। वाराणासी में अपने नामांकन से पहले एक नीजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में पीएम ने यह बात कही है।
मैने ना ही मुस्लमान कहा, ना ही हिंदू…
पीएम ने कहा, अपने भाषणों में घुसपैठियों और अधिक बच्चों वाले लोगों के बारे में बात करते समय उनका मतलब कभी भी मुसलमानों से नहीं रहा। मैं हैरान हूं... आपसे किसने कहा कि जब भी कोई अधिक बच्चों वाले लोगों के बारे में बात करता है, तो यह निष्कर्ष निकाला जाता है कि वे मुसलमान हैं? आप मुसलमानों के प्रति इतने अन्यायी क्यों हैं? उन्होंने कहा कि देश के गरीबों के बीच, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, अधिक बच्चे पैदा करना एक आम समस्या है। पीएम ने कहा, मैने ना ही मुस्लमान कहा और ना ही हिंदू। मैने सिर्फ यह कहा की बच्चे उतने ही हो जितनो का लालन-पालन कर सको। सरकार को करना पड़े, ऐसी स्थिती मत करो।
मेरे बहुत सारे दोस्त हैं जो मुस्लिम
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे उनके पड़ोस में मुस्लिम परिवारों के बीच रहने से उन्हें उनके रीति-रिवाजों और प्रथाओं के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने कहा, हमारे घर में ईद भी मनती थी, और अन्य त्योहार भी। ईद के दिन हमारे धर खाना नहीं बनता था, क्योंकि मुस्लमान परिवार के धर खाना आया करता था। मुहर्रम का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, बचपन में घर के सामने से गुजरने वाले ताजीए के नीचें अनीवार्य रूप् से नीकलते थे। मेरे बहुत सारे दोस्त हैं जो मुस्लिम हैं... बस मैं इस पहलू का विज्ञापन करना पसंद नहीं करता।
गोधरा के बाद जानबूझकर मेरी छवि खराब की गई
यह पूछे जाने पर कि क्या वह इस धारणा को तोड़ने में असमर्थ हैं कि मोदी मुसलमानों के नहीं हैं, पीएम ने कहा, यह मुद्दा मुसलमानों के बारे में नहीं है। चाहे व्यक्तिगत रूप से मुसलमान मोदी के कितने भी समर्थक क्यों न हों, विचार की एक लहर है जो उन्हें निर्देशित करती है, यह करो, वह करो। उन्होंने कहा, 2002 के बाद गोधरा कांड के बाद जानबूझकर मेरी छवि खराब की गई। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें यकीन है कि मुसलमान अब भी उन्हें वोट देंगे, मोदी ने कहा, देश के लोग मुझे वोट देंगे। मैं कभी हिंदू-मुसलमान नहीं खेलूंगा; ये मेरा संकल्प है। मैं जिस दिन हिंदू-मुस्लमान की राजनीती का सहारा लुंगा उस दिन से सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रह जाउंगा। पीएम ने कहा, जब मैं घर देने की बात करता हूं तो 100 प्रतिशत डिलेवरी की बात करता हूं। मैं यह नहीं देखता की सामने वाला किस जाती और धर्म का है। जो लाभार्थी है उन्हे मिलना चाहिए। यह सच्चा सामाजिक न्याय है। यह सच्चा सेक्युलरिज्म है।
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