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यदि रेल से आप करते हैं सफर और टिकट चेकर से होती हैं खिच-खिच, तो यह खबर हैं आपके मतलब की

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यदि रेल से आप करते हैं सफर और टिकट चेकर से होती हैं खिच-खिच, तो यह खबर हैं आपके मतलब की

यदि रेल से आप करते हैं सफर और टिकट चेकर से होती हैं खिच-खिच, तो यह खबर हैं आपके मतलब की

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डेस्क रिपोर्टर

नई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। देश की लाइफ लाइन कही जाने वाली रेल में लगातार नियमों का सुधार कर आपकी यात्रा को सुखद करने का प्रयास किया जाता हैं। हम और आप जब भी रेलवे में यात्रा करते हैं तब हमेशा यात्रा में कुछ ना कुछ खलल पड़ता रहता हैं कभी साथ यात्रा कर रहें सह यात्री ऊँची ऊँची आवाज में गप्प लगाते रहतें हैं। टिकट चेकर से लेकर सीट की झिकझिक आम रहती हैं। अब रेलवे की ओर से एक अच्छी खबर आ रहीं टिकट चेकर से होने वाली झिकझिक कम होने जा रहीं हैं । रेलवे को कहने वाले उसे वैसे ही लाइफ लाइन नहीं कहते प्रतिदिन 40 करोड़ लोग रेलवे से अपने गंतव्य की यात्रा कर मंजिल तक पहुँचते हैं।


रेलवे का क्या हैं नियम
रेलवे में टिकट चेकर आपके सोते रहने पर आपको जगा कर आपकी टिकट चेक नहीं कर सकता। रेलवे नियमों के अनुसार यदि सफर के दौरान आपको नींद आ गई हैं तो आपको जगाया नहीं जा सकता यदि आप सुबह से रेल में सफर कर रहें हैं तो रात 10 बजे के बाद आपको टिकट चेकर (TTE)  डिस्टर्ब नहीं कर सकता हैं। इसका मतलब यह हुआ की रात 10 बजे के बाद टिकट या आई डी दिखाने के लिये नहीं कह सकता हैं। रेलवे नियमों के अनुसार टिकट चेकर (TTE) को टिकट चेक करने का अधिकार सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच यात्रियों के टिकट चेक करने का अधिकार देता हैं। जो यात्री सुबह से यात्रा कर रहा हैं उसे नींद से टिकट चेक करने के लिये जगाया नहीं जा सकता हैं। टिकट चेकर के पास एक सूची होती हैं जिसमें टिकट चेकर के पास यात्रियों की सभी जानकारी होती हैं कौन सा यात्री कौन सी जगह से कौन सी सीट पर यात्रा करेगा। वहीं यदि हमारी यात्रा रात 10 के बाद शुरु होती हैं तब टिकट चेकर को यह अधिकार होगा आपकी टिकट और आईडी चेक करें।

मीडिल बर्थ पर सफर करने का क्या हैं नियम
सफर के दौरान लोवर और मिडिल बर्थ को लेकर आपको हमेशा कहीं ना कहीं झिकझिक होते देखा जा सकता हैं इसका कारण हैं सफर के समय रेलवे नियमों की जानकारी नहीं होना। लोवर बर्थ पर यात्रा करने वाला यात्री 10 के बाद सोने की बात करता हैं जिस कारण मिडिल बर्थ पर सफर करने वाले यात्री को भी मजबूरी में बैठे रहना होता हैं। रेलवे नियमों के अनुसार रात 10 बजे के बाद अपनी बर्थ खोल कर सो सकतें हैं वहीं सुबह 6 बजे मिडिल बर्थ को खोलना पडे़गा।

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