
नई दिल्ली। 75वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया। राष्ट्रपति मुर्मू और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 'पारंपरिक बग्गी' में पहुंचे। राष्ट्रपति के साथ उनके अंगरक्षक भी थे। यह भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट है। इस रेजिमेंट के लिए आज खास दिन है क्योंकि उसने 1773 में अपनी स्थापना के बाद से सेवा के 250 वर्ष पूरे कर लिए हैं। राष्ट्रपति मुर्मू के राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद राष्ट्रगान हुआ और स्वदेशी तोप 105-एमएम इंडियन फील्ड गन के साथ 21 तोपों की सलामी दी गई। प्रधानमंत्री मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित वहां मौजूद सभी गणमान्य लोगों ने झंडे को सलामी दी। राष्ट्रगान के बाद भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, एकता एवं प्रगति, बढ़ती स्वदेशी क्षमताओं और देश में बढ़ती नारी शक्ति को प्रदर्शित किए जाने की शुरुआत हुई।
भव्य परेड में दुनिया ने देश की सैन्य और सांस्कृतिक को देखा। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में कर्तव्य पथ पर इस भव्य कार्यक्रम का गवाह बने। इसके साथ ही वह विश्व के उन चुनिंदा नेताओं की सूची में शुमार हो गए जिन्होंने पिछले सात दशकों में देश के सबसे बड़े समारोह की शोभा बढ़ाई है। यह छठा मौका था जब कोई फ्रांसीसी नेता गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बना है।
स्वदेशी बंदूक प्रणाली 105-एमएम इंडियन फील्ड गन के साथ 21 तोपों की सलामी दी गई। फिर 105 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 IV हेलीकॉप्टर ने कर्तव्य पथ पर उपस्थित दर्शकों पर फूलों की वर्षा की। परेड की शुरुआत पारंपरिक सैन्य बैंड के बजाय पहली बार विभिन्न प्रकार के ताल वाद्ययंत्र बजाते हुए 100 से अधिक महिला कलाकारों ताल वाद्ययंत्र बजाते हुए हुई। परेड की कमान दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने संभाली।
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