
नई दिल्ली। भारत में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच पेट्रोलियम मंत्री ने बड़ा बयान दिया है। सरकार का कहना है कि देश के पास अभी 60 दिन का कच्चा तेल, 60 दिन की LNG और 45 दिन की LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद पीएम मोदी लगातार लोगों से पेट्रोल-डीजल बचाने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने की अपील कर रहे हैं। यही सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है।
हरदीप पुरी बोले- घबराने की जरूरत नहीं
दिल्ली में आयोजित CII एनुअल बिजनेस समिट में पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने साफ कहा कि देश में ऊर्जा सप्लाई को लेकर कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की अपील का गलत मतलब निकालकर अफरा-तफरी फैलाना ठीक नहीं। लोगों को बयान ध्यान से सुनना चाहिए, न कि उसके अलग-अलग अर्थ निकालने चाहिए।
आखिर PM मोदी ने बचत की अपील क्यों की?
Narendra Modi ने लगातार दो दिनों तक लोगों से ईंधन और संसाधनों का सीमित इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के उपयोग पर जोर दिया। सरकार के मुताबिक यह अपील तेल की कमी की वजह से नहीं, बल्कि बढ़ते आयात बिल और डॉलर की बचत के लिए की गई है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।
तेल कंपनियों को रोज ₹1,000 करोड़ का नुकसान
हरदीप पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट का असर सीधे ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। सरकार कोशिश कर रही है कि इसका बोझ आम जनता पर कम पड़े। उन्होंने कहा कि सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। कुल घाटा बढ़कर लगभग ₹1.98 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
मंत्री के अनुसार पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब $64-65 प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर लगभग $115 प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यही वजह है कि भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक देश अब रोजाना तेल खरीदने पर करीब ₹4,760 करोड़ खर्च कर रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट संकट से बढ़ा दबाव
सरकार ने बताया कि दुनिया की कुल ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। भारत के कच्चे तेल आयात का करीब 85% हिस्सा इसी रास्ते से आता था। सबसे बड़ी चिंता LPG को लेकर थी, क्योंकि घरेलू रसोई गैस का लगभग 60% हिस्सा भी इसी मार्ग से आता था। ऐसे में सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया था।
LPG उत्पादन में बड़ा इजाफा
संकट के बीच सरकार ने घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। हरदीप पुरी के मुताबिक भारत ने अपना LPG उत्पादन 36,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया। सरकार इसे बड़ी उपलब्धि मान रही है, क्योंकि इससे आयात पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है।
देश के पास कितना तेल स्टॉक है?
भारत के रणनीतिक तेल भंडार विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में मौजूद हैं। यहां कुल 5.33 MMT कच्चा तेल रखने की क्षमता है। अभी यह स्टोरेज करीब 64% भरा हुआ है। सरकार के अनुसार रणनीतिक भंडार और तेल कंपनियों के स्टॉक को मिलाकर देश के पास करीब 60 दिनों का बैकअप मौजूद है।
क्या पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते घाटे के कारण तेल कंपनियां जल्द कीमतें बढ़ा सकती हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 15 मई के आसपास पेट्रोल और डीजल ₹4 से ₹5 प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं। वहीं LPG सिलेंडर की कीमत में भी करीब ₹50 तक बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
1991 जैसा संकट तो नहीं?
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन 1991 जैसी नहीं। उस समय भारत के पास रणनीतिक तेल भंडारण की व्यवस्था ही नहीं थी। हालांकि सरकार और कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर वैश्विक संकट लंबा चला, तो आम लोगों की जेब पर इसका असर कितना बढ़ेगा।
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