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भारत का सबसे बड़ा दुश्मन विदेशों पर उसकी निर्भरता है और देश को इससे बाहर निकलना होगा: पीएम नरेंद्र मोदी

21 सित, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भारत का सबसे बड़ा दुश्मन विदेशों पर उसकी निर्भरता है और देश को इससे बाहर निकलना होगा: पीएम नरेंद्र मोदी

भारत का सबसे बड़ा दुश्मन विदेशों पर उसकी निर्भरता है और देश को इससे बाहर निकलना होगा: पीएम नरेंद्र मोदी

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत पर ज़ोर देते हुए कहा है कि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन विदेशों पर उसकी निर्भरता है और देश को इससे बाहर निकलना होगा। उन्होंने सेमीकंडक्टर चिप्स से लेकर जहाज़ों तक सभी क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन के महत्व का उल्‍लेख किया।

 

 मोदी ने कल गुजरात के भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम में कहा कि 140 करोड़ भारतीयों का भविष्य बाहरी ताकतों के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता और न ही राष्ट्रीय विकास की प्रतिबद्धता विदेशों पर निर्भर हो सकती है।

 

उन्होंने घोषणा की कि सैकड़ों समस्याओं का एक ही समाधान है: आत्मनिर्भर भारत का निर्माण। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए चुनौतियों का सामना करना होगा, बाहरी निर्भरता कम करनी होगी और सच्ची आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन करना होगा।

   

 मोदी ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए एक आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने भारत के खड़ा होने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश को आत्मनिर्भर बनना होगा। भारत को एक समुद्री महाशक्ति बनाने के अपनी सरकार के दृष्टिकोण का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का लक्ष्य 2047 तक वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी हिस्सेदारी को तीन गुना बढ़ाना है।

   

 मोदी ने कहा कि देश अब अपनी विरासत को फिर से प्राप्त करने और एक वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में उभरने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के तट हमेशा से समृद्धि के प्रतीक रहे हैं और अब इसके समुद्री तट भारत के भविष्य के विकास के प्रवेश द्वार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र अगली पीढ़ी के सुधारों के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने घोषणा की कि यह क्षेत्र जल्द ही “एक राष्ट्र, एक बंदरगाह प्रक्रिया” को अपनाएगा, जिसका उद्देश्य पूरे देश में बंदरगाह प्रक्रिया को सरल बनाना है।

   

भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए हाल ही में लिए गए एक ऐतिहासिक निर्णय के बारे में  मोदी ने एक बड़े नीतिगत सुधार की घोषणा की जिसके तहत अब बड़े जहाजों को बुनियादी ढाँचे का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब किसी क्षेत्र को बुनियादी ढाँचे की मान्यता मिलती है, तो उसे महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहाज निर्माण कंपनियों को अब बैंकों से ऋण प्राप्त करना आसान हो जाएगा और उन्हें कम ब्याज दरों का लाभ मिलेगा।  मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस फ़ैसले से भारतीय शिपिंग कंपनियों पर वित्तीय बोझ कम होगा और उन्हें वैश्विक बाज़ार में ज़्यादा प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

   

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने 32 हजार करोड़ रुपये से ज़्यादा की कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।  मोदी ने 7 हजार आठ सौ करोड़ रुपये से ज़्यादा लागत की कई बड़ी समुद्री परियोजनाओं के साथ-साथ मुंबई अंतर्राष्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनल का भी उद्घाटन किया।

   

बाद में, प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद के पास प्राचीन शहर लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर-एनएमएचसी की प्रगति की समीक्षा की। एनएमएचसी का विकास 4 हजार 500 करोड़ रुपये की लागत से उस ऐतिहासिक स्थल पर किया जा रहा है जो कभी सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था।


सोशल मीडिया पोस्ट में  मोदी ने कहा कि पूरा होने के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री संग्रहालय होगा और यह भारत की प्राचीन समुद्री परंपराओं को प्रदर्शित करेगा तथा पर्यटन, अनुसंधान, शिक्षा और कौशल विकास के केंद्र के रूप में भी काम करेगा। प्रधानमंत्री ने धोलेरा स्मार्ट सिटी का हवाई सर्वेक्षण भी किया।

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