
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी नई वैश्विक टैरिफ व्यवस्था स्पष्ट नहीं करता, तब तक इस समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों के हितों की सुरक्षा बताई जा रही है।
नई टैरिफ नीति स्पष्ट होने का इंतजार
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है और कई बिंदुओं पर काम चल रहा है। हालांकि भारत का रुख साफ है कि अमेरिकी टैरिफ ढांचा स्पष्ट होने के बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएं। सरकार का मानना है कि बिना स्पष्ट टैरिफ संरचना के समझौता करना भविष्य में भारतीय उद्योग और निर्यातकों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
मार्च 2026 में होने थे समझौते पर हस्ताक्षर
इस अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर पहले उम्मीद थी कि मार्च 2026 में दोनों देश इस पर हस्ताक्षर कर देंगे। लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद हालात बदल गए। अदालत के निर्णय के कारण पहले लागू किए गए कई टैरिफ प्रभावहीन हो गए, जिसके बाद अमेरिका को अपनी टैरिफ नीति में बदलाव करना पड़ा। फिलहाल अमेरिका लगभग 15% टैरिफ वसूल रहा है।
फरवरी में घोषित हुई थी शुरुआती डील
भारत और अमेरिका ने फरवरी में एक प्रारंभिक व्यापार समझौते की घोषणा की थी। उस समझौते के तहत कुछ महत्वपूर्ण फैसले तय किए गए थे:
- भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने पर सहमति
- रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने की योजना
- कई उत्पादों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती
हालांकि बातचीत केवल टैरिफ तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच गैर-टैरिफ बाधाओं, विशेष उत्पादों पर शुल्क और व्यापार नियमों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा जारी है।
मलेशिया ने भी अमेरिकी ट्रेड डील से बनाई दूरी
अमेरिका की टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता का असर दूसरे देशों पर भी दिखने लगा है। मलेशिया ने हाल ही में अमेरिका के साथ हुई अपनी ट्रेड डील से हटने का फैसला लिया है। मलेशिया का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए मौजूदा समझौता अब प्रभावी नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य देश भी अपने व्यापार समझौतों की समीक्षा कर सकते हैं।
ट्रंप ने फिर दी टैरिफ लगाने की चेतावनी
इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह किसी न किसी रूप में फिर से टैरिफ लागू कर सकते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें टैरिफ लगाने का अधिकार है और वे इसे नए तरीके से लागू करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप प्रशासन अब ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 और सेक्शन 301 जैसे कानूनी प्रावधानों का उपयोग कर नए शुल्क लगाने की दिशा में काम कर रहा है।
1.6 ट्रिलियन डॉलर के राजस्व नुकसान की भरपाई की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अनुमान है कि अमेरिका को करीब 1.6 ट्रिलियन डॉलर के संभावित टैरिफ राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसी वजह से प्रशासन नए टैरिफ मॉडल और वैकल्पिक कानूनी रास्तों पर तेजी से काम कर रहा है।
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