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रिपोर्ट में दावा : स्वदेशी कोरोना वैक्सीन 'कोवीशील्ड' के दोनो डोज ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं

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रिपोर्ट में दावा : स्वदेशी कोरोना वैक्सीन 'कोवीशील्ड' के दोनो डोज ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं

रिपोर्ट में दावा : स्वदेशी कोरोना वैक्सीन 'कोवीशील्ड' के दोनो डोज ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं

News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
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नई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। भारत की स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड के दोनो डोज ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ कारगर नहीं है। UK हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, कोवीशील्ड के दूसरे डोज लगाने के 5 महीने बाद ही शरीर में संक्रमण के खिलाफ इम्युनिटी पावर घट जाती है। वहीं मॉडर्ना और फाइजर वैक्सीन के दोनों लगने के 6 महीने बाद इम्यूनिटी 70% से 10% पर आ जाती है।


तीसरी डोज से 88% बढ़ सकती है इम्युनिटी
उधर हाल ही में ब्रिटेन में UKHSA की रिपोर्ट यह भी दावा किया है कि मौजूदा वैक्सीन्स का तीसरा डोज ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ इम्यूनिटी 88% तक बढ़ा सकता है, इसलिए कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचने के लिए बूस्टर डोज (प्रिकॉशन डोज) लगवाना जरूरी है। 

अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आती
UKHSA ने अपनी रिपोर्ट में यह साफ कहा है कि, बूस्टर डोज कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन पर कम असरदार है। लेकिन बूस्टर डोज संक्रमितों को उन गंभीर लक्षणों से अवश्य बचाता है, जिन लोगों की अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आती है।

लक्षण न के बराबर आते है
रिपोरी में दावा किया है कि, बूस्टर डोज लगवाने से वैक्सीन की प्रभावशीलता 52% से लेकर 88% तक बढ़ जाती है, जिससे ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले गंभीर नहीं हो पाते हैं। तीसरी डोज के बाद लक्षण न के बराबर आते है और अस्पतालों में मरीजों के भर्ती होने का खतरा 81% तक कम हो जाता है। वहीं 5 वर्ष से 17 वर्ष तक के बच्चे भी अस्पताल में भर्ती होने से बच जाते हैं।

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