
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत ने शांति की पहल तेज कर दी है। ईरान-इजराइल संघर्ष के 22वें दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से सीधे बातचीत कर हालात पर चिंता जताई और क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पजशकियान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और मौजूदा हालात पर चर्चा की। मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि त्योहारों के इस समय में क्षेत्र में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को लेकर चिंता
प्रधानमंत्री ने खास तौर पर मिडिल ईस्ट में तेल, बिजली और अन्य जरूरी ढांचों पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे हमलों का असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ता है।
समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जोर
मोदी ने समुद्री मार्गों, खासकर अहम व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित और खुला रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक मार्गों को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेहरान का धन्यवाद भी किया।
ट्रम्प का NATO पर बड़ा हमला
दूसरी ओर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस संघर्ष को लेकर NATO देशों पर कड़ी टिप्पणी की है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि सहयोगी देश युद्ध में अमेरिका का साथ देने से बच रहे हैं और उन्होंने उन्हें "कायर" तक कह दिया।
होर्मुज स्ट्रेट पर बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए सैन्य सहयोग देना कोई बड़ा जोखिम नहीं है, फिर भी NATO देश पीछे हट रहे हैं। उनका कहना था कि यह एक आसान सैन्य कदम है, लेकिन सहयोगी देशों की अनिच्छा अमेरिका को याद रहेगी।
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