
जंग का 27वां दिन — और इस बीच एक ऐसी खबर आई जिसने भारत समेत कई देशों को बड़ी राहत दी। ईरान ने एलान किया है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना रोकटोक गुजर सकते हैं। यानी दुनिया की सबसे अहम तेल धमनी पर लटकी तलवार अब थोड़ी ऊपर उठी है। इसी के साथ अमेरिका ने भी ईरान को जंग खत्म करने का एक 15 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है।
ईरान ने दी 'मित्र देशों' को होर्मुज से गुजरने की छूट
मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट के हवाले से न्यूज एजेंसी ANI ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह साफ किया है कि जो देश ईरान के विरुद्ध नहीं हैं, उन्हें होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही में कोई बाधा नहीं आएगी। ईरान ने पहले भी यह संकेत दिया था कि यह रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है — बस विरोधी देशों के लिए दरवाजे बंद हैं। अब कुछ शर्तों के साथ मित्र देशों को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी मिल गई है।
भारत के लिए क्यों है यह खबर इतनी जरूरी?
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसमें से आधे से ज्यादा तेल खाड़ी देशों से आता है और होर्मुज इस पूरी सप्लाई चेन का सबसे संवेदनशील मोड़ है। देश की रोजाना की खपत करीब 50 लाख बैरल है — यानी इस रास्ते का बंद रहना भारत के लिए सीधे तेल संकट में बदल सकता था।
होर्मुज खुलने से भारत को 5 बड़े फायदे
1. तेल सप्लाई निर्बाध: खाड़ी से भारत आने वाला तेल बिना किसी रुकावट के आता रहेगा।
2. कीमतों में राहत: जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थी। रास्ता खुलने से बाजार में स्थिरता आएगी।
3. शिपिंग लागत घटेगी: तनाव के दौरान जहाज बीमा 2 से 3 गुना तक बढ़ गया था। अब परिवहन सस्ता होगा।
4. डिलीवरी तेज: मध्य पूर्व से भारत तक तेल टैंकर अब 5 से 10 दिनों में पहुंच सकते हैं।
5. उद्योगों को राहत: महंगे तेल की मार झेल रहे भारतीय उद्योग और आम उपभोक्ता दोनों को फायदा होगा।
ईरान का बड़ा दावा — अमेरिकी फाइटर जेट मार गिराया, US ने नकारा
इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बुधवार रात एक अमेरिकी F/A-18 फाइटर जेट को ध्वस्त किया, जो हिंद महासागर में जा गिरा। यह कार्रवाई ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्र के पास हुई बताई जा रही है। लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई हादसा हुआ ही नहीं। इस तरह के परस्पर विरोधी दावे युद्ध के दौरान सूचना युद्ध का हिस्सा माने जा रहे हैं।
अमेरिका ने भेजा 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान को युद्ध विराम और दीर्घकालिक शांति के लिए 15 बिंदुओं का एक प्रस्ताव भेजा है। दिलचस्प बात यह है कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए तेहरान तक पहुंचाया गया है और पाकिस्तानी सेना प्रमुख इस पूरी प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभा रहे हैं।
क्या-क्या है इस प्रस्ताव में?
अमेरिका ने ईरान के सामने कई अहम मांगें रखी हैं। परमाणु कार्यक्रम पर रोक और यूरेनियम संवर्धन सीमित करना इनमें सबसे ऊपर है। नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसे परमाणु ठिकानों को नियंत्रित करना तथा IAEA को सभी साइटों पर बेरोकटोक पहुंच देना भी इसमें शामिल है। इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में कटौती, हिजबुल्लाह जैसे सहयोगी संगठनों को समर्थन घटाना और क्षेत्र में सैन्य तनाव कम करना भी प्रस्ताव का हिस्सा है। बदले में अमेरिका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग देने और मध्य पूर्व में स्थायी शांति का रोडमैप बनाने का वादा किया है।
तेल की कीमतें कब गिरेंगी? एक्सपर्ट की राय
अर्थशास्त्री विलियम ली के मुताबिक अमेरिका ने अपने स्ट्रैटेजिक रिजर्व से तेल बाजार में उतारना शुरू किया है, लेकिन इसका वास्तविक असर सीमित रहेगा। उनका कहना है कि यह कदम बाजार को मनोवैज्ञानिक रूप से शांत करता है — असली सप्लाई में बड़ा फर्क नहीं पड़ता। अमेरिका के पास करीब 41.5 करोड़ बैरल का रणनीतिक भंडार है, लेकिन इसे एशिया तक पहुंचाने में समय और लागत दोनों लगती है।
विलियम ली का साफ कहना है — तेल बाजार में असली राहत तभी आएगी जब चीन अपना तेल भंडार बाजार में उतारे। माना जाता है कि चीन के पास दुनिया का सबसे विशाल रणनीतिक तेल भंडार है, लेकिन वह इसके आंकड़े कभी सार्वजनिक नहीं करता। अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि बीजिंग इस दिशा में कोई कदम उठाने वाला है।
उम्मीद की किरण, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की यह घोषणा भारत के लिए राहत भरी खबर जरूर है, लेकिन जंग अभी थमी नहीं है। अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है — बशर्ते ईरान इस पर गंभीरता से विचार करे। फिलहाल दुनिया की नजर तेहरान के जवाब और बीजिंग के अगले कदम पर टिकी है।
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