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LPG Crisis: युद्ध के बीच भारत को राहत, 50 हजार टन गैस लेकर ‘शिवालिक’ जहाज आज मुंद्रा पोर्ट पहुंचेगा
16 मार्च, 2026 0 व्यूज 4 मिनट पढ़ाई
LPG Crisis: युद्ध के बीच भारत को राहत, 50 हजार टन गैस लेकर ‘शिवालिक’ जहाज आज मुंद्रा पोर्ट पहुंचेगा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव के कारण दुनियाभर में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसका असर भारत में भी दिखने लगा है, जहां एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसी बीच राहत की खबर सामने आई है। एलपीजी से भरा ‘शिवालिक’ नाम का जहाज सोमवार को गुजरात के तट पर पहुंचने वाला है, जिससे देश की गैस आपूर्ति को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद है।


होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच रहा जहाज

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा के मुताबिक एलपीजी से भरा ‘शिवालिक’ जहाज खाड़ी क्षेत्र से रवाना होकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है और अब गुजरात स्थित Mundra Port की ओर बढ़ रहा है। इस जहाज के पहुंचने के बाद गैस की खेप उतारी जाएगी और इसे देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाएगा।


जहाज से कितनी LPG आएगी

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जहाज में लगभग 40,000 से 50,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है। हालांकि अंतिम मात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। बताया जाता है कि इस जहाज की कुल क्षमता लगभग 54,000 मीट्रिक टन तक है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह खेप भारत की कुल मांग के मुकाबले सीमित है, क्योंकि देश में रोजाना लगभग 55,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी की खपत होती है।


कमर्शियल सिलेंडर की कमी से बढ़ी मांग

देश के कई शहरों में फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं।


इसके कारण:

- होटल और रेस्टोरेंट घरेलू सिलेंडर की ओर शिफ्ट हो रहे हैं

- घरेलू सिलेंडरों की मांग अचानक बढ़ रही है

- कई जगह सप्लाई पर दबाव दिखाई दे रहा है


हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है और आपूर्ति को संतुलित करने के प्रयास जारी हैं।


कल आएगा एक और LPG जहाज

सरकारी सूत्रों के अनुसार गैस की आपूर्ति बढ़ाने के लिए एक और जहाज भारत पहुंचने वाला है। एलपीजी से भरा ‘नंदा देवी’ जहाज मंगलवार को गुजरात के Kandla Port पहुंचेगा। इससे देश में गैस की उपलब्धता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।


युद्ध का असर ऊर्जा बाजार पर

- ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।

- खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा

- समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता

- ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव


इसी वजह से कई देशों की तरह भारत भी गैस और तेल की आपूर्ति को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।


आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर असर जारी रह सकता है। ऐसे में भारत के लिए लगातार एलपीजी और ऊर्जा संसाधनों की वैकल्पिक व्यवस्था करना जरूरी होगा।

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