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महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी जरूरी, 20 अगस्त से RTO जांच अभियान शुरू, नियम नहीं मानने पर लाइसेंस सस्पेंड होगा

19 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी जरूरी, 20 अगस्त से RTO जांच अभियान शुरू, नियम नहीं मानने पर लाइसेंस सस्पेंड होगा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का कामचलाऊ ज्ञान जरूरी करने की तैयारी शुरू हो गई है। 20 अगस्त से पूरे राज्य में एक महीने का जांच अभियान चलेगा।


परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक, जिन ड्राइवरों को मराठी का ‘वर्किंग नॉलेज’ नहीं है, उन्हें पहले नोटिस देकर 3 महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद भी भाषा नहीं सीखने पर लाइसेंस और बैज सस्पेंड किया जा सकता है।


RTO की टीमें करेंगी ड्राइवरों की जांच

अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ को दी गई है। राज्यभर में RTO की फ्लाइंग स्क्वॉड ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच करेंगी। जांच के दौरान नए नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी पड़ताल के साथ वेरिफिकेशन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी।


सरकार का लक्ष्य करीब 6 लाख ड्राइवरों तक पहुंचना

महाराष्ट्र में सरकार के आंकड़ों के अनुसार करीब 9.16 लाख ऑटो-रिक्शा और 61,657 टैक्सियां हैं। इन वाहनों की बड़ी संख्या मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी MMR में संचालित होती है। सरकार लगभग 6 लाख ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने की पहल से जोड़ना चाहती है। कुछ महीने पहले शुरू किए गए अभियान में अब तक 1,65,601 ड्राइवर हिस्सा ले चुके हैं।


‘वर्किंग नॉलेज’ की परिभाषा पर सवाल

सेवा सारथी ऑटो-रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डीएम गोसावी ने नियम की स्पष्टता को लेकर चिंता जताई है। उनका सवाल है कि सरकार ने मराठी के कामचलाऊ ज्ञान की शर्त तो रखी है, लेकिन यह नहीं बताया कि ड्राइवर को कितनी मराठी आना जरूरी होगी। गोसावी के अनुसार, मानक स्पष्ट नहीं होने पर RTO स्तर पर भ्रष्टाचार और ड्राइवरों के आर्थिक शोषण की आशंका पैदा हो सकती है।


दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों की बढ़ी चिंता

महाराष्ट्र के ऑटो और टैक्सी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से आए बड़ी संख्या में ड्राइवर काम करते हैं। इनमें कुछ ड्राइवर मराठी नहीं जानते, जबकि कई केवल थोड़ी-बहुत मराठी बोल पाते हैं। लाइसेंस और परमिट रद्द होने की आशंका ऐसे ड्राइवरों के बीच चिंता का कारण बनी हुई है।


प्रताप सरनाईक खुद चला चुके हैं ऑटो

मराठी भाषा से जुड़े इस फैसले की घोषणा करने वाले परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का शुरुआती जीवन ऑटो-रिक्शा से जुड़ा रहा है। राजनीति में आने से पहले वह ठाणे में ऑटो चलाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के दौरान उन्होंने अगरबत्ती और कैलेंडर बेचने का काम भी किया। बाद में उन्होंने रियल एस्टेट और हॉस्पिटैलिटी कारोबार में प्रवेश किया तथा विहंग ग्रुप से जुड़े।


2024 के चुनावी हलफनामे में सरनाईक ने अपना पेशा बिल्डर और होटल बिजनेस बताया था। वह वर्तमान में शिंदे गुट की शिवसेना के विधायक हैं।


रामदास आठवले ने मांगा ज्यादा समय

केंद्रीय मंत्री और RPI(A) प्रमुख रामदास आठवले ने मराठी नहीं जानने वाले ड्राइवरों पर तत्काल कार्रवाई के बजाय अतिरिक्त समय देने की बात कही है। उनका कहना है कि कई चालक पहले से मराठी सीख रहे हैं। इसलिए उनके खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाने के बजाय और वक्त दिया जाना चाहिए। आठवले ने चेताया कि परमिट रद्द करने जैसी कार्रवाई विवाद को बढ़ा सकती है और दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर डाल सकती है।

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