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दिल्ली ब्लास्ट केस की आर्थिक गुत्थी में बड़ा खुलासा! अल-फलाह ग्रुप चेयरमैन जवाद सिद्दीकी 13 दिन की ईडी हिरासत में

19 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
दिल्ली ब्लास्ट केस की आर्थिक गुत्थी में बड़ा खुलासा! अल-फलाह ग्रुप चेयरमैन जवाद सिद्दीकी 13 दिन की ईडी हिरासत में

दिल्ली ब्लास्ट केस की आर्थिक गुत्थी में बड़ा खुलासा! अल-फलाह ग्रुप चेयरमैन जवाद सिद्दीकी 13 दिन की ईडी हिरासत में

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

दिल्ली ब्लास्ट मामले से जुड़े वित्तीय अपराधों की जांच में शनिवार देर रात बड़ा मोड़ आया। अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को दिल्ली की अदालत ने 13 दिनों के लिए ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की हिरासत में भेज दिया। यह आदेश एडिशनल सेशंस जज शीतल चौधरी प्रधान ने रात करीब 12 बजे अपने कैंप ऑफिस से जारी किया, जिसे ईडी की चल रही जांच के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।


आधी रात हुई गिरफ्तारी, पीएमएलए की धारा 19 के तहत कार्रवाई

ईडी ने कोर्ट को बताया कि सिद्दीकी को 18 नवंबर की रात मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। एजेंसी के अनुसार, उसके पास ऐसे वित्तीय दस्तावेज, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा हैं जो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े, धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग की ओर संकेत करते हैं।


अपराध की आय को वैध दिखाने के लिए किए गए जटिल लेनदेन

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, प्रारंभिक आधार पर यह माना जा सकता है कि आरोपी ने अपराध से जुड़ी कमाई को छिपाने और उसे वैध दिखाने के लिए जटिल वित्तीय लेनदेन किए। इसके अलावा, अदालत ने माना कि

➡️ मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है

➡️ कई महत्वपूर्ण कड़ियां अभी सामने आना बाकी हैं

➡️ आरोपी से गहन पूछताछ जरूरी है।


सबूत नष्ट करने और गवाह प्रभावित करने का खतरा

कोर्ट ने माना कि यदि इस समय आरोपी से पूछताछ नहीं की गई तो

 ➡️ वह वित्तीय दस्तावेज छिपा सकता है

 ➡️ संदिग्ध संपत्ति इधर-उधर कर सकता है

 ➡️ गवाहों को प्रभावित कर सकता है।

इसी आधार पर अदालत ने 13 दिन की ईडी हिरासत मंजूर की।


मान्यता के नाम पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप

ईडी के अनुसार, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों ने कई सालों तक मान्यता और कानूनी स्थिति को लेकर गलत जानकारी देकर छात्रों को गुमराह किया।

वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच

➡️ संस्थान ने लगभग ₹415.10 करोड़ रुपये ‘शैक्षणिक प्राप्तियों’ (Educational Receipts) के रूप में कमाए।

➡️ ईडी ने इसे ‘अपराध की आय’ (Proceeds of Crime) माना।

➡️ बताया गया कि यह रकम जालसाजी, धोखाधड़ी और अवैध वसूली का परिणाम हो सकती है।


अब अगला कदम क्या?

➡️ ईडी हिरासत के दौरान आरोपियों से मनी ट्रेल, निवेश, साझेदारों और विदेशी फंडिंग पर पूछताछ होगी।

➡️ एजेंसी डिजिटल डेटा, बैंक खातों और फंडिंग नेटवर्क का विश्लेषण करेगी।

➡️ दिल्ली ब्लास्ट केस से कथित आर्थिक कनेक्शन की भी जांच होगी।

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