
नई दिल्ली। मेनका गांधी का मानना है की उनके बेटे वरुण गांधी को सोशल मीडिया प्लेफॉम एक्स पर पार्टी के लिए आलोचनात्मक बयान दने के कारण इस बार लोकसभा का टिकट नहीं मिला है, इसके अलावा और कोई भी कारण नहीं है। उनहोंने कहा, एक मां के तौर पर उन्हें बुरा लगा कि वरुण की जगह जितिन प्रसाद को पीलीभीत से टिकट दिया गया, लेकिन यह पार्टी का फैसला था। मेनका गांधी ने कहा, मुझे यकीन है कि वरुण बिना टिकट के भी बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि वरुण को लोकसभा का टिकट देना चाहिए था।
मां के लिए प्रचार कर सकते है वरुण
बतादें मेनका गांधी की सीट सुल्तानपुर में 25 मई को छठे दौर का मतदान होना है और वरुण गांधी उनके लिए प्रचार कर सकते हैं। मेनका ने कहा, वरुण चुनाव प्रचार के लिए आना चाहते हैं लेकिन इस बारे में अभी फैसला नहीं हुआ है।
19 अप्रैल को पीलीभीत में हुआ मतदान
पीलीभीत में पहले चरण में 19 अप्रैल को भाजपा के जितिन प्रसाद, समाजवादी पार्टी के भगवंत सरन गंगवार और बहुजन समाज पार्टी के अनीस अहमद खान के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में मतदान हुआ है। ऐसी अटकलें थीं कि वरुण गांधी निर्दलिय उम्मीदवार के रूप में मैदान में कूद सकते हैं, लेकिन वरुण गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से खुद को दूर कर लिया। वो न तो स्वतंत्र रूप से और न ही किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं।
मोदी योगी की रैली में नहीं दिखे वरुण
टिकट कटने के बाद से वरुण गांधी पीलीभीत में नजर नहीं आए। वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में भी शामिल नहीं हुए।
वरुण ने लिखा था भावनात्मक पत्र
टिकट कटने के बाद उन्होंने पीलीभीत के लोगों को एक भावनात्मक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने 1983 में तीन साल की उम्र में पहली बार पीलीभीत आने का जिक्र किया था। अपने पत्र में वरुण ने लिखा, आज जब मैं यह पत्र लिख रहा हूं, तो अनगिनत यादें मुझे भावुक कर रही हैं। मुझे तीन साल का वह छोटा बच्चा याद आ रहा है, जो 1983 में पहली बार अपनी मां की उंगलियां पकड़कर पीलीभीत आया था। उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था। उस दिन यह भूमि उनकी कर्मभूमि बन जाएगी और यहां के लोग उनका परिवार बन जाएंगे। पीलीभीत द्वारा दिए गए आदर्श न केवल एक सांसद के रूप में बल्कि एक व्यक्ति के रूप में भी मेरे पालन-पोषण और विकास में सहायक रहे। आपका प्रतिनिधि होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है और मैंने हमेशा आपके हितों के लिए अपनी पुरी क्षमता के साथ आवाज उठाई है। एक सांसद के रूप में नहीं तो कम से कम एक बेटे के रूप में, मैं जीवन भर आपकी सेवा करने के लिए प्रतिब हूं और मेरे दरवाजे पहले की तरह आपके लिए हमेशा खुले रहेंगे। मैं आम आदमी की आवाज उठाने के लिए राजनीति में आया था और आज मैं यह काम हमेशा करते रहने के लिए आपका आशीर्वाद चाहता हूं, भले ही इसके लिए मुझे कोई भी कीमत चुकानी पड़े।
मेनका और वरुण का पीलीभीत से है पुराना नाता
पीलीभीत का मेनका गांधी और वरुण गांधी से पुराना नाता रहा है और यह पहली बार है कि इनमें से किसी ने भी यहां से चुनाव नहीं लड़ा। मेनका गांधी ने 1989 में जनता दल के टिकट पर पीलीभीत से जीत हासिल की, 1991 में हार गईं और 1996 में फिर से जीत हासिल की। उन्होंने 1998 और 1999 में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में फिर से निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। उन्होंने 2004 और 2014 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में सीट जीती। वरुण गांधी ने 2009 और 2019 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में सीट जीती।
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