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पाकिस्तान से बातचीत भारत की सुरक्षा के लिए भी जरूरी... मार्को रूबियो ने बताई अमेरिकी रणनीति, ईरान पर भी साधा निशाना

21 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पाकिस्तान से बातचीत भारत की सुरक्षा के लिए भी जरूरी... मार्को रूबियो ने बताई अमेरिकी रणनीति, ईरान पर भी साधा निशाना
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने के पीछे परमाणु हथियारों और उसकी भौगोलिक स्थिति को अहम वजह बताया है। उन्होंने ईरान पर समुद्री व्यापार को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा और आर्थिक दबाव जारी रखने की अमेरिकी नीति पर भी बात की।


नेटवर्क18 को दिए इंटरव्यू में रूबियो ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मतभेद रखने वाले देशों से भी बातचीत जरूरी हो सकती है। उन्होंने भारत के ईरान के साथ संबंधों का उदाहरण देते हुए कूटनीति में संतुलन की जरूरत बताई और समुद्री हमलों में भारतीय नाविकों की मौत का भी जिक्र किया।


पाकिस्तान को लेकर अमेरिका का क्या है तर्क?

मार्को रूबियो के मुताबिक, पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और उसकी भौगोलिक स्थिति भी उसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। इस कारण अमेरिका के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखना जरूरी है।


रूबियो ने भारत और ईरान के संबंधों का हवाला देकर समझाया कि देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद राजनयिक संपर्क बनाए रखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद से भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं से जुड़ी गतिविधियों को रोकने में मदद मिल सकती है।


आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर अमेरिका का रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश दुनिया में कहीं भी आतंकवाद को समर्थन देने वालों के खिलाफ है। उनके बयान में आतंकवाद के मुद्दे और पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने की नीति को अलग-अलग नहीं, बल्कि कूटनीतिक दृष्टिकोण के संदर्भ में रखा गया।


रूबियो के अनुसार, अलग-अलग देशों के साथ संबंधों का प्रबंधन करना आसान नहीं है। भारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत और मतभेदों के बीच संतुलन बनाना विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


ईरान के नेतृत्व के साथ समझौते में मुश्किल क्यों?

रूबियो ने ईरान की शासन व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि वहां कट्टरपंथी शिया धर्मगुरुओं का प्रभाव निर्णय लेने की प्रक्रिया पर पड़ता है। उनके मुताबिक, धार्मिक आधार पर फैसले लेने वाले कट्टरपंथी नेताओं के साथ समझौते तक पहुंचना कठिन है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी सभी शिया धर्मगुरुओं के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए है जिन्हें वह कट्टरपंथी मानते हैं। रूबियो ने ईरान के नेतृत्व पर समझौते के प्रति अनिच्छुक होने का आरोप भी लगाया।


होर्मुज से तेल की सप्लाई पर क्या बोले रूबियो?

रूबियो ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति जारी है। उनके अनुसार, इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही और तेल की सप्लाई संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के 80 से 100 प्रतिशत के बीच बनी हुई है।


उन्होंने ईरान पर ऐसे व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जिनका युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं है। रूबियो ने कहा कि इन हमलों से जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की जान जोखिम में पड़ रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इनकी निंदा करनी चाहिए।


दूसरे विश्व युद्ध से की हमलों की तुलना

अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरान पर लगाए गए आरोपों के संदर्भ में दूसरे विश्व युद्ध का उदाहरण दिया। उन्होंने उस दौर में जर्मनी की नाजी सेना की पनडुब्बियों द्वारा व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की तुलना मौजूदा समुद्री हमलों से की।


रूबियो का कहना था कि व्यापारिक जहाजों पर हमलों के खिलाफ दुनिया के देशों को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने समुद्री मार्गों पर सुरक्षा बनाए रखने को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बताया।


भारतीय नाविकों की मौत का भी जिक्र

रूबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान की ओर से किए जाने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों से समुद्री जहाजों की रक्षा करने में जुटा है। उनके मुताबिक, जहाजों को निशाना बनाने के लिए छोड़े गए अधिकतर ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया जाता है, लेकिन कुछ हमले सुरक्षा व्यवस्था को पार कर नुकसान पहुंचाते हैं।


उन्होंने इन हमलों में भारतीय नाविकों की मौत का उल्लेख किया। रूबियो के अनुसार, समुद्री व्यापार में भारतीय नाविकों की बड़ी भागीदारी होने के कारण वे भी इन घटनाओं से प्रभावित हुए हैं।


ईरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने की तैयारी

रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की नीति जारी रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने संसाधनों का उपयोग आम नागरिकों का जीवन बेहतर बनाने के बजाय आतंकवाद को समर्थन देने और सैन्य क्षमता बढ़ाने में कर रहा है।


उनके आरोपों के मुताबिक, ईरान मिसाइल और ड्रोन बनाने के साथ ऐसे हथियारों पर भी संसाधन खर्च करता है, जिनका इस्तेमाल व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।


रूबियो के बयान से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दे

- पाकिस्तान के साथ संवाद: अमेरिका परमाणु हथियारों और भौगोलिक स्थिति को पाकिस्तान से बातचीत बनाए रखने की वजह मानता है। रूबियो ने भारत-पाकिस्तान संवाद को भारत की सुरक्षा चिंताओं के संदर्भ में भी रखा।

- समुद्री मार्गों की सुरक्षा: होर्मुज से ऊर्जा आपूर्ति जारी रहने का दावा करते हुए रूबियो ने व्यापारिक जहाजों पर हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताया।

- ईरान पर आर्थिक दबाव: अमेरिकी विदेश मंत्री ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों तथा आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों का हवाला देकर दबाव जारी रखने की बात कही।

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