
नई दिल्ली। मोदी के विजय रथ को रोकने के लिए इस बार विपक्ष ने नई रणनीति बनाई है। पूरे देश में विपक्ष एकजुट होकर मोदी को हराने के लिए वोटरों की घेराबंदी कर रहा है। 2024 का ये चुनाव इस लिए भी अलग है। इस बार वोटर के पास कोई च्वाइस नहीं है, दो ही रास्ता है या मोदी के साथ या खिलाफ। क्योंकि पीएम मोदी के खिलाफ 26 पार्टियां एक जुट हैं ये वो पार्टियां है जो देश के अलग अलग राज्यों में अपना अच्छा प्रभाव रखतीं हैं।
इंडी गठबंधन के पास अभी तक कोई पीएम का चेहरा नहीं है,नहीं है । अगर मुद्दे की बात करें तो वो बीजेपी के हिंदुत्व के मुद्दे के खिलाफ एक जुटता किसान और रोजगार है। बीजेपी 2024 का चुनाव अयोध्या मंदिर के इर्द गिर्द लड़ने की रणनीति पर है। इसके लिए बीजेपी ने मेगा प्लान तैयार किया है। मंदिर में भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पार्टी घर घर दस्तक दे रही है । निमंत्रण के साथ पीले चावल घर घर तक पहुंचाए जा रहे है।
जहां बीजेपी इसे सबसे बड़ा आयोजन बता रही है और विपक्ष को भी आमंत्रित कर रही है वहीं विपक्ष में इसे लेकर असमंजन की स्थिति है कोई चुप है तो कोई इसे बीजेपी और आरएसएस का कार्यक्रम बताकर विरोध कर रहा है।
वहीं अगर कांग्रेस की बात करें तो राहुल गांधी ने मणिपुर से अपनी पैदल यात्रा शुरू कर दी है। मणिपुर में पिछले साल जातीय हिंसा भड़की थी जिसमें बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए थे और मारे भी गये थे। यात्रा की शुरूआत मणिपुर से करने के पीछे दंगा एक बड़ा मुद्दा हो सकता है जिसका सियायी फायदा 2024 लोकसभा चुनाव में मणिपुर में कांग्रेस को मिल सके।
एक नजर डालते हैं 2019 के उन बड़े चुनावी मुद्दों पर जिनके इर्द गिर्द रही सियासत
2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान राष्ट्रवाद, राम मंदिर से लेकर पाकिस्तान, किसान और जवान के इर्द-गिर्द ही चुनाव सिमट गया था। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद बीजेपी ने इस मुद्दे को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना लिया था। पार्टी का हर नेता विपक्ष को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर घेरता दिखा था।
वहीं 2019 में कांग्रेस राफेल को लेकर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रमक रही। कांग्रेस ने राफेल को प्रमुख मुद्दा बनाया था और हर स्तर पर बीजेपी को इसी मुद्दे पर घेर रही थी। चाहे वह संसद हो या फिर सड़क। तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी हर रैलियों और भाषणों में राफेल के मुद्दे को उठा रहे थे। 2019 में राहुल गांधी ने 'चौकीदार ही चोर' के जरिए राफेल को उस वक्त का सबसे अहम मुद्दा बनाया था।
कांग्रेस ने 2019 का चुनाव मोदी बनाम राहुल गांधी बनाया था, जिसमें बीजेपी को ऐतिहासिक बहुमत मिली थी।
खैर इस बार का आम चुनाव कई मायनों में अलग है, इस बार कांग्रेस 26 दलों के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही है। हालांकि इंडी गठबंधन अभी टिकट बंटवारा और गठबंधन का संयोजक कौन होगा जैसे मसलों में उलझी है। समय समय पर गठबंधन के नेता रोजगार और किसान की बात करते रहते हैं, लेकिन गठबंधन किन मुद्दे के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा उस पर अभी रणनीति बनाई जा रही है ।
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