
डेस्क रिपोर्टर
News World Deskशरद व्यास/नई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। देश से इस वक्त सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। आखिरकार एक साल बाद मोदी सरकार को किसानों के आगे झुकना ही पड़ा। सरकार ने किसानों के लिए बनाए गए तीन कृषि कानून बिल को वापस लेने का फैसला किया है। संसद के सत्र में इन कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। राष्ट्र के नाम अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने यह ऐलान किया है।
संसद सत्र में शुरू होगी बिल वापस लेने की प्रक्रिया
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, देशवासियों से मैं क्षमा मांगते हुए, सच्चे मन से कहना चाहता हूं की हमारे प्रयास में कमी रही होगी कि हम उन्हें समझा नहीं पाए। आज गुरुनानक जी की जयंती पर यह बताने आया हूं, की सरकार तीनों कृषि कानून बिल को वापस ले रही है। उन्होंने कहा कि, इसकी प्रक्रिया इस महीने के अंत मे शुरू होने जा रहे संसद सत्र में तीनों बिलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। पीएम ने किसानों से अपील की है कि वो अपने घर लौटें, खेतों में लौटें।
दरअसल आज प्रधानमंत्री देश के नाम अपना संदेश दे रहे थे। उनका कोरोना काल मे यह 11वां संबोधन है। इससे पहले उन्होंने 100 करोड़ वैक्सीन डोज लगने पर देश को संबोधित किया था।
क्या कहा पीएम ने अपने संदेश में
आज गुरु नानक देव जी का पवित्र प्रकाश पर्व है। मैं विश्वभर में सभी लोगों को और सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई देता हूं। ये भी बहुत सुखद है, कि डेढ़ साल के अंतराल के बाद करतारपुर साबिह कॉरिडोर अब फिर से खुल गया है।
अपने पांच दशक के जीवन में किसानों की चुनौतियों को बहुत करीब से देखा है जब देश हमें 2014 में प्रधानसेवक के रूप में सेवा का अवसर दिया तो हमने कृषि विकास, किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। देश के छोटे किसानों की चुनौतियों को दूर करने के लिए, हमने बीज, बीमा, बाजार और बचत, इन सभी पर चौतरफा काम किया। सरकार ने अच्छी क्वालिटी के बीज के साथ ही किसानों को नीम कोटेड यूरिया, सॉयल हेल्थ कार्ड, माइक्रो इरिगेशन जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा।
किसानों को उनकी मेहनत के बदले उपज की सही कीमत मिले, इसके लिए भी अनेक कदम उठाए गए। देश ने अपने Rural market infrastructure को मजबूत किया। हमने MSP तो बढ़ाई ही, साथ ही साथ रिकॉर्ड सरकारी खरीद केंद्र भी बनाए। हमारी सरकार द्वारा की गई उपज की खरीद ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए है। किसानों की स्थिति को सुधारने के इसी महाअभियान में देश में तीन कृषि कानून लाए गए थे। मकसद ये था कि देश के किसानों को, खासकर छोटे किसानों को, और ताकत मिले, उन्हें अपनी उपज की सही कीमत और उपज बेचने के लिए ज्यादा से ज्यादा विकल्प मिले।
बरसों से ये मांग देश के किसान, देश के कृषि विशेषज्ञ, देश के किसान संगठन लगातार कर रहे थे। पहले भी कई सरकारों ने इस पर मंथन किया था। इस बार भी संसद में चर्चा हुई, मंथन हुआ और ये कानून लाए गए। देश के कोने-कोने में कोटि-कोटि किसानों ने, अनेक किसान संगठनों ने, इसका स्वागत किया, समर्थन किया। मैं आज उन सभी का बहुत आभारी हूं।
प्रधानमंत्री ने कहा, आज मैं सभी को बताना चाहता हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने का फैसला किया है। हमारी सरकार, किसानों के कल्याण के लिए, खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए, देश के कृषि जगत के हित में, देश के हित में, गांव गरीब के उज्जवल भविष्य के लिए, पूरी सत्य निष्ठा से, किसानों के प्रति समर्पण भाव से, नेक नीयत से ये कानून लेकर आई थी।
लेकिन इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए। कृषि अर्थशास्त्रियों ने, वैज्ञानिकों ने, प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें कृषि कानूनों के महत्व को समझाने का भरपूर प्रयास किया। आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को Repeal करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे।
आज ही सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक और अहम फैसला लिया है। जीरो बजट खेती यानि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए, देश की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर क्रॉप पैटर्न को वैज्ञानिक तरीके से बदलने के लिए। एमएसपी को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए, ऐसे सभी विषयों पर, भविष्य को ध्यान में रखते हुए, निर्णय लेने के लिए, एक कमेटी का गठन किया जाएगा। इस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे, किसान होंगे, कृषि वैज्ञानिक होंगे, कृषि अर्थशास्त्री होंगे।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

