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नायरा एनर्जी ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, अब क्या सरकारी कंपनियां भी देंगी राहत?

01 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
नायरा एनर्जी ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, अब क्या सरकारी कंपनियां भी देंगी राहत?
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। देश में पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों के बीच निजी क्षेत्र की नायरा एनर्जी ने उपभोक्ताओं को राहत दी है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर घटा दिए हैं।


नायरा एनर्जी के इस फैसले के बाद सरकारी तेल कंपनियों पर भी कीमतें कम करने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने फिलहाल किसी तरह की कटौती की घोषणा नहीं की है।


पेट्रोल पर मिल रहा है अच्छा मार्जिन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) इस समय पेट्रोल पर करीब 5 से 6 रुपये प्रति लीटर का मार्केटिंग मार्जिन कमा रही हैं। नायरा एनर्जी ने इसी मार्जिन का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाते हुए कीमतों में कटौती की है। वहीं सरकारी कंपनियों की ओर से अभी तक किसी राहत का संकेत नहीं मिला है।


डीजल पर अब भी नुकसान

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों को डीजल पर अभी भी 8 से 10 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह मानी जा रही है कि कंपनियां फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में व्यापक कटौती करने के पक्ष में नहीं दिख रही हैं।


क्या सरकारी कंपनियां भी घटाएंगी दाम?

विशेषज्ञों के अनुसार, निजी कंपनी द्वारा कीमतें कम किए जाने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों से तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है। बताया जा रहा है कि कंपनियां पहले पुराने घाटे की भरपाई करना चाहती हैं। वहीं सरकार भी उपभोक्ताओं को पहले दी गई राहत से जुड़े राजकोषीय भार की भरपाई पर ध्यान दे सकती है।


कच्चे तेल की कीमतों में कैसे आया उतार-चढ़ाव?

भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। 27 फरवरी को भारतीय तेल बास्केट की कीमत 71.17 डॉलर प्रति बैरल थी। मार्च की शुरुआत में यह बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। मई तक कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रहीं। जून के मध्य तक यह फिर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई।


होर्मुज मार्ग खुलने से मिली राहत

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। बाद में दोनों देशों के बीच शांति समझौते की संभावना बनने और एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद होर्मुज मार्ग दोबारा खुल गया। इसके बाद तेल की आपूर्ति सामान्य होने लगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।


सरकार पर पड़ा बड़ा वित्तीय बोझ

बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। उस समय पेट्रोल पर कंपनियों को 26 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। डीजल पर नुकसान 81.90 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था। इसके बाद 15 मई से 25 मई के बीच कंपनियों ने पेट्रोल के दाम 7.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 7.53 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए थे।


मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उपभोक्ताओं को राहत देने के कारण सरकार पर अब तक करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजकोषीय बोझ पड़ा है। वहीं एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार को हर महीने लगभग 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।


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