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ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ा बदलाव, रक्षा खरीद में रिकॉर्ड मंजूरी और दुनिया में बढ़ी भारतीय हथियारों की मांग

14 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बड़ा बदलाव, रक्षा खरीद में रिकॉर्ड मंजूरी और दुनिया में बढ़ी भारतीय हथियारों की मांग
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी रक्षा तैयारियों को नई दिशा दी है। पिछले 14 महीनों में रक्षा खरीद से जुड़े रिकॉर्ड प्रस्तावों को मंजूरी मिली है, जिनकी कुल अनुमानित कीमत ₹9.80 लाख करोड़ से अधिक है।


इन फैसलों से संकेत मिलता है कि सैन्य तैयारी अब केवल सीमित जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लंबी अवधि और कई मोर्चों पर चलने वाले संभावित संघर्षों को ध्यान में रखकर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।


रक्षा खरीद में रिकॉर्ड मंजूरी

संघर्ष के बाद डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने कुल 55 रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रस्तावों पर होने वाला खर्च एकमुश्त नहीं होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में विभिन्न रक्षा सौदों, निर्माण परियोजनाओं और आधुनिकीकरण कार्यक्रमों के जरिए किया जाएगा। नई योजनाओं का उद्देश्य सेना के लिए लंबे समय तक हथियारों की उपलब्धता, तेज मरम्मत व्यवस्था और मजबूत लॉजिस्टिक सपोर्ट सुनिश्चित करना है।


क्यों बदली सैन्य सोच

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में दुनिया के कई लंबे सैन्य संघर्षों ने भारत की रणनीतिक सोच को प्रभावित किया है।


मुख्य कारण:

  • युद्ध की आशंका पहले की तुलना में अधिक सामान्य होती जा रही है।

  • संघर्ष शुरू होने के बाद उसे जल्दी समाप्त करना कठिन हो गया है।

  • विरोधी देश लंबे समय तक आर्थिक और सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति अपनाते हैं।


विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया के युद्धों से मिले अनुभवों का असर भारत की रक्षा योजना में दिखाई दे रहा है। हालांकि पनडुब्बियों और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से जुड़ी परियोजनाओं में देरी अब भी चुनौती बनी हुई है।


ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय हथियारों की बढ़ी मांग

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस, आकाश, लॉयटरिंग म्युनिशन और नेत्र जैसे स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के इस्तेमाल के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग बढ़ी है। कई देशों ने इन हथियारों को खरीदने में रुचि दिखाई है और कुछ देशों के साथ ₹21,000 करोड़ से अधिक के रक्षा सौदे भी हो चुके हैं।


रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर ₹38,424 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 62% अधिक है। ब्रह्मोस मिसाइल के लिए फिलीपींस, वियतनाम और दो अन्य देशों के साथ लगभग ₹12,500 करोड़ के समझौते हो चुके हैं। वहीं इंडोनेशिया के साथ करीब ₹3,600 करोड़ की डील अंतिम मंजूरी के चरण में है। इसके अलावा आर्मेनिया के साथ आकाश मिसाइल सिस्टम के लिए ₹6,100 करोड़ का अनुबंध पहले ही किया जा चुका है।


100 से अधिक देशों तक पहुंचा भारतीय रक्षा निर्यात

भारत अब 100 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। इनमें अमेरिका, फ्रांस और आर्मेनिया प्रमुख बाजार हैं। अमेरिका भारतीय रक्षा उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार है, जहां 2.8 अरब डॉलर मूल्य के सिस्टम और पार्ट्स बोइंग तथा लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियों को भेजे जाते हैं। वहीं आर्मेनिया जैसे देश तैयार हथियारों की खरीद कर रहे हैं। सरकार ने 2029-30 तक रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। तुलना करें तो 2016-17 में यह आंकड़ा केवल ₹1,522 करोड़ था, यानी एक दशक से भी कम समय में रक्षा निर्यात में 25 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है।

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