
श्रीनगर। कश्मीर की खूबसूरत बैसरन घाटी आज भी खामोश है। एक साल पहले 26 लोगों की हत्या ने इस जगह की पहचान बदल दी—और अब यहां सन्नाटा ही सच्चाई बन गया है।
हमले के बाद वीरान हुई ‘मिनी स्विट्जरलैंड’
Baisaran Valley, जिसे कभी “मिनी स्विट्जरलैंड” कहा जाता था, अब सूनी पड़ी है। घास के मैदान, देवदार के जंगल और बर्फीली पहाड़ियों से घिरी यह जगह कभी टूरिस्ट्स से भरी रहती थी। लेकिन 22 अप्रैल 2025 के हमले के बाद यहां का रास्ता ही बंद कर दिया गया—और एक साल बाद भी हालात नहीं बदले हैं।
13 मिनट का हमला, 26 जिंदगियां खत्म
हमला दोपहर करीब 2:20 बजे शुरू हुआ। जंगल से आए तीन आतंकियों ने अचानक गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। खुले मैदान में छिपने की कोई जगह नहीं थी, लोग भागते रहे लेकिन बच नहीं पाए। सिर्फ 13 मिनट में 26 लोगों की मौत ने पूरे देश को हिला दिया—और इस घाटी को हमेशा के लिए बदल दिया।
टूरिज्म पर बड़ा असर, 10 हजार से घटकर 2 हजार
हमले से पहले पहलगाम में हर दिन 10,000+ टूरिस्ट पहुंचते थे। अब यह संख्या घटकर सिर्फ 2000-2500 रह गई है। 48 में से 6 टूरिस्ट स्पॉट अब भी बंद हैं, जिनमें बैसरन घाटी प्रमुख है—और यही सबसे बड़ा झटका लोकल लोगों को लगा है।
QR कोड से सुरक्षा, लेकिन डर अभी भी कायम
अब पहलगाम में घोड़े वालों, गाइड और दुकानदारों को QR कोड आधारित पहचान पत्र दिए जा रहे हैं। स्कैन करते ही उनका नाम, पता और वेरिफिकेशन स्टेटस सामने आ जाता है। यह कदम सुरक्षा के लिहाज से बड़ा है, लेकिन सवाल अभी भी बना है—क्या इससे टूरिस्ट का भरोसा पूरी तरह लौट पाएगा?
गाइड और पोनी वालों की रोजी पर संकट
पहले जहां हर जगह घोड़े और गाइड नजर आते थे, अब उनकी संख्या काफी कम हो गई है। कई लोगों को अपने घोड़े और गाड़ियां बेचनी पड़ीं, और जो बचे हैं वे दिनभर में सिर्फ ₹200-500 कमा पा रहे हैं। लोकल लोग मांग कर रहे हैं कि कम से कम कुछ और टूरिस्ट स्पॉट खोले जाएं, ताकि उनकी जिंदगी फिर पटरी पर लौट सके।
EMI का दबाव, बैंक जब्ती का डर
टूर ऑपरेटर्स का कहना है कि काम ठप होने से वे गाड़ियों की EMI नहीं भर पा रहे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो बैंक गाड़ियां जब्त कर सकते हैं। उनका कहना है कि अगर चंदनवाड़ी जैसे स्पॉट खोले जाएं, तो टूरिज्म को कुछ राहत मिल सकती है—और यही उम्मीद अब उनकी आखिरी उम्मीद बन गई है।
आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई, लेकिन घाटी अब भी बंद
हमले में शामिल आतंकियों को मार गिराया गया और भारत ने जवाबी कार्रवाई भी की। साथ ही मददगारों के खिलाफ 1300 पेज की चार्जशीट दाखिल कर ट्रायल शुरू कर दिया गया है। लेकिन इन सबके बावजूद बैसरन घाटी अब भी बंद है—और यही सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
एक बहादुर कहानी भी सामने आई
हमले के दौरान कश्मीरी युवक Syed Adil Hussain ने एक आतंकी से भिड़कर टूरिस्ट को बचाने की कोशिश की। उन्हें 3 गोलियां लगीं और उनकी मौत हो गई। सरकार ने उनकी पत्नी को नौकरी और परिवार को घर दिया—लेकिन यह बलिदान आज भी घाटी की खामोशी में गूंजता है।
अब भी इंतजार—कब खुलेगी बैसरन घाटी?
सुरक्षा एजेंसियां अभी भी हालात की समीक्षा कर रही हैं। जब तक पूरी तरह क्लियरेंस नहीं मिलती, घाटी को खोलने का फैसला टलता रहेगा।
लेकिन सवाल वही है—क्या कश्मीर की यह खूबसूरत घाटी फिर से अपनी रौनक पा सकेगी, या डर की छाया लंबे समय तक बनी रहेगी?
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