
भोपाल। देशभर में सामने आए पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि अब ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे, ताकि दोषियों को जल्दी सजा मिल सके।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ धोखा करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और किसी भी दोषी को राहत नहीं दी जाएगी।
पेपर लीक मामलों की होगी त्वरित सुनवाई
अब तक पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती रही है, जिसके कारण फैसले आने में कई वर्ष लग जाते थे। नई व्यवस्था के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट में इन मामलों की तेजी से सुनवाई कराने की योजना है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी।
घोषणा के समय जारी था प्रदर्शन
प्रधानमंत्री का यह ऐलान उस समय सामने आया, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लगातार जारी है। पार्टी पिछले 34 दिनों से धरना दे रही है। उधर, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 26 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रदर्शन कैसा रहा है?
केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रेप और POCSO मामलों के लिए गठित फास्ट ट्रैक अदालतों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
2019 से 2025 के बीच 3.06 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया।
इन अदालतों का निपटान दर 96.28% दर्ज किया गया।
2025 के अंत तक 2.45 लाख से अधिक मामले लंबित रहे।
2024 के अंत में लंबित मामलों की संख्या 2.04 लाख थी।
इन आंकड़ों के आधार पर सरकार का मानना है कि पेपर लीक मामलों में भी फास्ट ट्रैक कोर्ट न्याय प्रक्रिया को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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