
नई दिल्ली। श्रील प्रभुपाद की 150वीं जयंती,लोकसभा चुनाव से पहले संसद में बजट सत्र चल रहा है। आम चुनाव से पहले यह संसद का आखिरी सत्र है। सरकार की तरफ से संसद के सत्र की अवधि को बढ़ा दिया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि, इसके पीछे की वजह सरकार की तरफ से लाया जाने वाला श्वेत पत्र है। सरकार की तरफ से यह श्वेत पत्र अर्थव्यवस्था पर होगा। इस श्वेत पत्र में मोदी सरकार के सत्ता में आने से यानी 2014 से पहले और उसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति की तुलना की जाएगी।
अब सवाल उठता है कि, श्वेत पत्र के लिए सरकार ये वक्त क्यो चुना। दरअसल लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती है। मोदी सरकार इस बजट सत्र में एक श्वेत पत्र ला रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि मोदी सरकार पिछले 10 सालों में कैसे बदलाव लेकर आई।
एनडीए सरकार ने अक्सर कांग्रेस पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया है। अर्थव्यवस्था और 'श्वेत पत्र' उन्हें अगले दो महीनों में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले विपक्ष पर हमला करने का मौका देंगे। इससे पहले केंद्र सरकार के मंत्री लगातार दावा करते रहे हैं कि, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2014 में अर्थव्यवस्था को 'संकट' की स्थिति में छोड़ दिया था। इस श्वेत पत्र के जरिये वो अपनी बात को न्यायसंगत ठहराएंगे। बीजेपी नेता जयंत सिन्हा ने दावा किया कि भारत 2013 में 'नाजुक पांच' अर्थव्यवस्थाओं में से एक था।
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