
नई दिल्ली। गूगल पर अचानक 'Lockdown in India' ट्रेंड करने लगा — और इसकी वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वो बयान जो उन्होंने सोमवार को लोकसभा में दिया। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को उन्होंने देश के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बताया और कहा कि हमें कोरोना जैसी मुश्किलों के लिए एक बार फिर तैयार रहना होगा। लेकिन सवाल यह है — क्या सच में भारत में लॉकडाउन लगने वाला है? आइए समझते हैं पूरा माजरा।
दुनिया में रोज 1.1 करोड़ बैरल तेल का नुकसान — IEA की बड़ी चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इस मौजूदा स्थिति को पिछले कई दशकों का सबसे भयावह ऊर्जा संकट करार दिया है। दुनियाभर में हर दिन करीब 1.1 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। तुलना करें तो 1970 के दशक में जब वैश्विक ऊर्जा संकट आया था, तब रोज सिर्फ 50 लाख बैरल का नुकसान हो रहा था — यानी आज का संकट उससे दोगुने से भी ज्यादा गंभीर है। पीएम मोदी ने संसद में इसी खतरे की तरफ इशारा किया था।
फिलीपींस ने घोषित की राष्ट्रीय ऊर्जा आपातस्थिति
IEA की इस चेतावनी के बाद दुनिया के कई देश हरकत में आ गए हैं। फिलीपींस ने तो 'नेशनल एनर्जी इमरजेंसी' तक घोषित कर दी है। वहां के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने देश की ईंधन आपूर्ति को लेकर खतरे की घंटी बजाई है।
फिलीपींस में उठाए गए आपात कदम:
- सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम
- गैर-जरूरी यात्राओं पर रोक
- ऊर्जा बचाने के प्रोटोकॉल लागू
- तेल आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत खोजे जा रहे हैं
- फिलहाल देश के पास 45 दिन का ईंधन भंडार मौजूद है
पड़ोसी देशों का हाल — पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश भी परेशान
इस संकट की आंच सिर्फ फिलीपींस तक नहीं रुकी। भारत के आसपास के देश भी इसकी चपेट में हैं। श्रीलंका में कुछ क्षेत्रों में जबरन सार्वजनिक छुट्टियां लागू की गई हैं। बांग्लादेश ने ऑनलाइन पढ़ाई को बढ़ावा दिया है और तय घंटों पर बिजली काटी जा रही है। पाकिस्तान ने काम के घंटे घटाए हैं, जबकि वियतनाम ने कारोबारियों को घर से काम करने की सलाह दी है।
भारत की क्या है रणनीति? कैसे संभाला जा रहा है संकट
भारत की तेल और गैस की करीब 50 फीसदी आपूर्ति खाड़ी देशों के रास्ते, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से होती रही है। इस रास्ते के बाधित होने का सीधा असर देश में महसूस किया जा रहा है। कई जगहों पर LPG गैस सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
भारत सरकार ने उठाए ये ठोस कदम
सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कई मोर्चों पर काम शुरू कर दिया है।
आपूर्ति विविधता: पहले भारत 27 देशों से तेल और गैस मंगाता था, अब यह दायरा बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गया है। पीएम मोदी ने खुद यह जानकारी संसद में दी।
रणनीतिक भंडार: देश के पास अभी 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है। इसके अलावा, अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन के भंडार को बढ़ाने का काम तेज गति से चल रहा है।
घरेलू उत्पादन: इंडस्ट्रियल गैस की आपूर्ति में कटौती कर LPG उत्पादन को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही पिछले 11 साल में देश की तेल शोधन क्षमता में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
तो क्या भारत में लगेगा लॉकडाउन?
जो लोग 'Lockdown in India' सर्च कर रहे हैं, उनके लिए स्पष्ट जवाब यह है — फिलहाल देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है। हालांकि, अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो हालात और पेचीदा हो सकते हैं। लेकिन यह कोरोना महामारी जैसा संकट नहीं है, इसलिए उस तरह का लॉकडाउन लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि परिस्थितियां और बिगड़ती हैं तो सरकार कुछ ऐसे उपायों पर विचार कर सकती है:
- वर्क फ्रॉम होम को बड़े पैमाने पर बढ़ावा
- इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर जोर
- सोलर एनर्जी और इंडक्शन चूल्हे को अपनाने की सरकारी मुहिम
- काला बाजारी और जमाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई
पीएम मोदी का पूरा संदेश — धैर्य, एकता और सतर्कता
लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जो संघर्ष चल रहा है, उसके दीर्घकालिक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ सकते हैं। उन्होंने देशवासियों से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की और कहा कि जिस तरह देश कोरोना के दौरान एकजुट रहा, उसी भावना से इस चुनौती का सामना करना होगा।
जमाखोरों पर होगी कड़ी नजर
पीएम ने साफ शब्दों में कहा कि संकट के समय कुछ लोग जमाखोरी और काला बाजारी जैसी हरकतें करते हैं। इन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी और किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारें और देश के नागरिक मिलकर चलेंगे, तो हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है।
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