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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 घटी, तेल कंपनियां बढ़ा सकती थी दाम इसलिए सरकार ने लिया बड़ा फैसला

27 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 घटी, तेल कंपनियां बढ़ा सकती थी दाम इसलिए सरकार ने लिया बड़ा फैसला
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर ₹10-₹10 एक्साइज ड्यूटी घटा दी, लेकिन आम आदमी को राहत तुरंत नहीं मिलने वाली। सवाल बड़ा है—जब टैक्स कम हुआ, तो दाम क्यों नहीं घटे? यही पूरा गणित समझना जरूरी है…


सरकार का बड़ा फैसला, टैक्स में सीधी कटौती

सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी है। वहीं डीजल पर ₹10 से घटाकर शून्य कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 73 डॉलर से बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल पार कर चुका है…


फिर भी दाम कम क्यों नहीं होंगे?

सीधी बात—पेट्रोल-डीजल के रेट सरकार तय नहीं करती। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियां अपने हिसाब से कीमत तय करती हैं। इसलिए टैक्स कम होने के बावजूद कंपनियां दाम घटाने के बजाय पहले अपना नुकसान कवर करेंगी…


तेल कंपनियां भारी घाटे में, यही बड़ा कारण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनियां फिलहाल पेट्रोल पर करीब ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर का घाटा झेल रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कच्चा तेल महंगा हुआ, लेकिन घरेलू कीमतें नहीं बढ़ाई गईं। अब कंपनियां इसी टैक्स राहत से अपना बैलेंस ठीक करना चाहती हैं…


प्राइवेट कंपनियों ने पहले ही बढ़ाए दाम

सरकारी फैसले से ठीक पहले कुछ प्राइवेट कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए थे। उदाहरण के तौर पर एक कंपनी ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा कर दिया। भोपाल में पेट्रोल ₹111.72 और डीजल ₹94.88 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि बाजार पर दबाव कितना ज्यादा है…


आगे क्या? दाम बढ़ेंगे या मिल सकती है राहत

भविष्य पूरी तरह ग्लोबल मार्केट पर निर्भर है। अगर कच्चा तेल 100 डॉलर से ऊपर बना रहता है या और बढ़ता है, तो कीमतें बढ़ने का दबाव बना रहेगा। सरकार की यह कटौती फिलहाल एक “कुशन” की तरह काम करेगी, जिससे दाम अचानक बहुत ज्यादा न बढ़ें।


क्या राज्य भी VAT घटाएंगे?

अक्सर केंद्र के फैसले के बाद राज्यों पर भी दबाव बनता है कि वे VAT कम करें। अगर राज्य सरकारें टैक्स घटाती हैं, तभी आम लोगों को पेट्रोल-डीजल पर ₹2 से ₹5 प्रति लीटर तक की असली राहत मिल सकती है…


दाम बढ़ते जल्दी, घटते देर से क्यों?

यह सवाल हर उपभोक्ता के मन में है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो कंपनियां घाटा सहती हैं। लेकिन जब कीमतें गिरती हैं, तो पहले पुराने घाटे की भरपाई की जाती है। इसके अलावा टैक्स स्ट्रक्चर, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और पुराने महंगे स्टॉक भी दाम कम होने से रोकते हैं…


राहत अभी नहीं, लेकिन झटका टला

सरकार की इस कटौती से तुरंत राहत भले न मिले, लेकिन बड़ा झटका टल गया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि ग्लोबल हालात क्या मोड़ लेते हैं—क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों की असली चाबी अब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के हाथ में है…

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