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पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा: 2 साल बाद बढ़े दाम, दिल्ली में नए दाम लागू, CNG भी बढ़ी, आम आदमी की चिंता बढ़ी

15 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा: 2 साल बाद बढ़े दाम, दिल्ली में नए दाम लागू, CNG भी बढ़ी, आम आदमी की चिंता बढ़ी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी की टेंशन बढ़ा दी है। करीब 2 साल बाद तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं और नए रेट 15 मई से लागू हो गए हैं। अब दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर बिक रहा है। सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, CNG की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए लोगों को ₹79.09 चुकाने होंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई का असर और गहरा सकता है।


महंगे ईंधन का सीधा असर आपकी जेब पर

डीजल की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा के सामान पर पड़ता है। ट्रक और मालवाहक गाड़ियों का खर्च बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो सकते हैं। यानी आने वाले दिनों में बाजार में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। यही वजह है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहने वाली।


खेती और किसानों की लागत भी बढ़ेगी

डीजल महंगा होने से किसानों की लागत पर भी असर पड़ेगा। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पानी के पंप जैसे कृषि उपकरण डीजल पर चलते हैं। ऐसे में खेती का खर्च बढ़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो अनाज और दूसरी कृषि उपज की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है।


बस, ऑटो और स्कूल वैन का किराया बढ़ सकता है

ईंधन महंगा होने के बाद सार्वजनिक परिवहन का खर्च भी बढ़ना तय माना जा रहा है। ऑटो, टैक्सी और निजी बस ऑपरेटर किराए में बढ़ोतरी कर सकते हैं। स्कूल बसों के किराए पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। यानी घर से ऑफिस और बच्चों के स्कूल तक का खर्च बढ़ने की संभावना है।


आखिर क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?

रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतें करीब 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा था। इसी दबाव को कम करने के लिए कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो आगे और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।


पड़ोसी देशों में पहले ही बढ़ चुके थे दाम

सरकार पहले यह कहती रही थी कि वैश्विक हालात के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया। जबकि पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही 15% से 20% तक बढ़ चुकी थीं। अब भारत में भी कीमतें बढ़ने के बाद लोगों के बीच महंगाई को लेकर चिंता तेज हो गई है।


चुनाव से पहले मिली थी राहत

मार्च 2024 से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी।

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