
नई दिल्ली। देशभर में महंगाई का नया झटका लगा है। तेल कंपनियों ने आज यानी 25 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। अब दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर बिक रहा है। इस फैसले का असर सिर्फ गाड़ियों के खर्च तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में सब्जियों से लेकर बस किराए और खेती तक सब कुछ महंगा हो सकता है।
कितने बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
तेल कंपनियों ने पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। करीब एक साल बाद कीमतों में यह बड़ा बदलाव हुआ है। इससे पहले मार्च 2024 से पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए थे। अब आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
सबसे पहले क्या होगा महंगा?
ईंधन महंगा होने का असर सबसे पहले ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दिखाई देता है। ट्रक और टेम्पो ऑपरेटर किराया बढ़ा सकते हैं। इसका सीधा असर दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, दूध और राशन पर पड़ेगा। यानी आने वाले दिनों में बाजार में खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं।
खेती की लागत भी बढ़ेगी
डीजल महंगा होने से किसानों की लागत बढ़ने वाली है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पंपिंग सेट चलाने में ज्यादा खर्च आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लंबे समय तक यही स्थिति बनी रही तो गेहूं, चावल और दूसरी फसलों की कीमतों पर भी असर दिख सकता है।
बस-ऑटो और स्कूल फीस पर भी असर
सार्वजनिक परिवहन संचालक भी अब किराया बढ़ाने की तैयारी कर सकते हैं। ऑटो, टैक्सी और निजी बसों का खर्च बढ़ेगा। स्कूल बस ऑपरेटरों पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में पैरेंट्स को अगले कुछ महीनों में ट्रांसपोर्ट फीस बढ़ने का सामना करना पड़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों हुआ?
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। कच्चा तेल महंगा होने से सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा और अब कंपनियों ने कीमतें बढ़ाकर घाटा कम करने की कोशिश की है।
तेल की कीमत आखिर तय कैसे होती है?
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति का सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दाम पर पड़ता है। ईंधन उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले कई चरणों से गुजरता है —
- कच्चे तेल की कीमत
- रिफाइनिंग खर्च
- कंपनियों का मार्जिन
- केंद्र की एक्साइज ड्यूटी
- डीलर कमीशन
- राज्यों का VAT
इन्हीं टैक्स और चार्ज की वजह से बेस प्राइस कई गुना बढ़ जाता है।
सरकार ने पहले क्यों नहीं बढ़ने दिए दाम?
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले केंद्र सरकार ने जनता को राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके अलावा एक्साइज ड्यूटी में भी बड़ी कमी की गई थी। पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 और डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। इसी वजह से पिछले कई महीनों तक कीमतें स्थिर बनी रहीं।
तेल कंपनियों को कितना नुकसान हो रहा था?
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL जैसी कंपनियां लंबे समय से घाटे में चल रही थीं। सरकार की ओर से बताया गया कि कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30 हजार करोड़ का नुकसान हो रहा था। यही वजह है कि अब कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया।
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेलंगाना के एक कार्यक्रम में लोगों से पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल सोच-समझकर करने की अपील की थी। पीएम ने कहा था कि भारत के पास बड़े तेल भंडार नहीं हैं, इसलिए देश को ईंधन की बचत की दिशा में गंभीरता से काम करना होगा। अब बढ़ती कीमतों के बीच उनका यह बयान फिर चर्चा में आ गया है।
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