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पेट्रोल एक्सपोर्ट पर नया टैक्स, सरकार ने तेल कंपनियों पर कसी लगाम

16 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
पेट्रोल एक्सपोर्ट पर नया टैक्स, सरकार ने तेल कंपनियों पर कसी लगाम
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अब पेट्रोल को विदेश भेजने पर ₹3 प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगा दिया है। वहीं डीजल और हवाई जहाज के ईंधन यानी ATF पर टैक्स कम कर कंपनियों को राहत दी गई है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे भारत में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी।


पेट्रोल एक्सपोर्ट पर पहली बार सख्ती

सरकार ने साफ किया है कि अब अगर कोई भारतीय तेल कंपनी पेट्रोल को देश में बेचने के बजाय विदेश भेजती है, तो उसे हर लीटर पर ₹3 अतिरिक्त टैक्स देना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद पहली बार पेट्रोल पर ऐसा विंडफॉल टै्स लगाया गया है। इसका मकसद कंपनियों को घरेलू बाजार में ज्यादा सप्लाई बनाए रखने के लिए मजबूर करना है।


डीजल और ATF पर टैक्स घटाया गया

जहां पेट्रोल पर सख्ती दिखाई गई है, वहीं सरकार ने डीजल और जेट फ्यूल पर राहत दी है। डीजल एक्सपोर्ट पर टैक्स को ₹23 से घटाकर ₹16.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं हवाई जहाज के ईंधन ATF पर टैक्स ₹33 से घटाकर ₹16 प्रति लीटर कर दिया गया है। इससे तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिलने वाली है।


तेल कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

सरकारी फैसले के बाद अब पेट्रोल का एक्सपोर्ट कंपनियों के लिए महंगा हो जाएगा। इससे वे विदेश भेजने के बजाय भारत में ज्यादा पेट्रोल बेच सकती हैं। दूसरी तरफ डीजल और ATF पर टैक्स घटने से कंपनियों का मुनाफा कुछ हद तक संतुलित रहेगा। यानी सरकार ने सख्ती और राहत—दोनों का बैलेंस बनाने की कोशिश की है।


आखिर कंपनियां विदेश में तेल क्यों बेचना चाहती हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा युद्ध और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। कुछ समय पहले तक कच्चा तेल करीब 73 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 100 डॉलर के पार पहुंच चुका है। ऐसे में प्राइवेट कंपनियों को विदेशी बाजारों में ज्यादा मुनाफा दिखाई दे रहा था। सरकार को डर था कि कंपनियां घरेलू सप्लाई कम कर सकती हैं, इसलिए यह नया टैक्स लागू किया गया।


क्या आपके शहर में पेट्रोल-डीजल और महंगा होगा?

वित्त मंत्रालय के अनुसार इस नए फैसले का असर सीधे आम जनता पर नहीं पड़ेगा। सरकार ने साफ किया है कि यह टैक्स सिर्फ एक्सपोर्ट किए जाने वाले तेल पर लागू होगा। यानी देश के अंदर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। फिलहाल पंपों पर कीमतें इसी फैसले की वजह से नहीं बढ़ेंगी।


फिर पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा क्यों हुआ?

दरअसल, इस फैसले से पहले सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार सुबह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी थी। कंपनियों का कहना है कि महंगे कच्चे तेल की वजह से उनकी लागत बढ़ गई थी। उसी बोझ को कम करने के लिए कीमतें बढ़ाई गईं। इसके साथ ही CNG की कीमतों में भी ₹2 प्रति किलो तक इजाफा हुआ है।


क्या होता है विंडफॉल टैक्स?

विंडफॉल टैक्स का मतलब उस अतिरिक्त कमाई पर टैक्स लगाना होता है, जो कंपनियों को अचानक बने हालातों की वजह से मिलने लगती है। जैसे युद्ध, संकट या सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में तेल कंपनियों का मुनाफा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार उस अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा टैक्स के रूप में लेती है, ताकि बाजार में संतुलन बना रहे।


होर्मुज रूट क्यों बना पूरी दुनिया की चिंता?

होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण इस रूट पर खतरा बढ़ गया है। सप्लाई प्रभावित होने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें उछल गई हैं और इसका असर भारत समेत कई देशों पर दिखाई दे रहा है।

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