
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से भारत के विकास में अपनी ऊर्जा और क्षमता लगाने की अपील की है। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा-सेवा ज्योति यात्रा’ में उन्होंने कहा कि देश के सामने मौजूद युवा शक्ति एक बड़ा अवसर है।
सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने के अवसर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने युवाओं से कहा कि अब रुकने या आराम करने का वक्त नहीं है। उनका जोर इस बात पर रहा कि मौजूदा पीढ़ी ऐसी दिशा में काम करे, जिससे आने वाली पीढ़ियों को पिछली पीढ़ियों जैसी कठिन परिस्थितियों से न गुजरना पड़े।
पिछली पीढ़ियों की मुश्किलें भविष्य की पीढ़ी तक न पहुंचें
पीएम मोदी ने युवाओं को देश के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दादा-दादी और नाना-नानी की पीढ़ी ने जिन परेशानियों और कष्टों का सामना किया, उन्हें अगली पीढ़ियों तक पहुंचने से रोकने के लिए अभी से प्रयास जरूरी हैं। उनके मुताबिक भारत की बड़ी युवा आबादी देश के इतिहास में मिले महत्वपूर्ण अवसर के समान है। इस अवसर का इस्तेमाल देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए होना चाहिए।
गुजरात के अनुभव से बताया जनभागीदारी का महत्व
प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक सफर के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए गुजरात के दिनों को याद किया। उस समय उनका मंत्र था—‘गुजरात का विकास, देश का विकास।’ उन्होंने कहा कि उस दौर में उनके पास सरकार या प्रशासन चलाने का अनुभव नहीं था। उनके पास जो प्रमुख ताकत थी, वह जनता का विश्वास और जनशक्ति पर भरोसा था। पीएम मोदी के मुताबिक इसी भरोसे के आधार पर लोगों को निर्णय प्रक्रिया में जोड़ा गया और नीतियों के निर्माण तथा उनके अमल में जनता की भागीदारी सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि ‘हम यह करके दिखाएंगे’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ने पर जनता के साथ से परिणाम सामने आते हैं।
50 की उम्र तक जंगल और पहाड़ों में किया सेवा कार्य
प्रधानमंत्री ने अपने सार्वजनिक जीवन के पिछले 25 वर्षों को याद करते हुए अपने पुराने दौर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 25 साल पहले जब वह 50 वर्ष के थे, तब उनके जीवन का बड़ा हिस्सा जंगलों में आदिवासी समुदायों के बीच सेवा करते और पहाड़ी इलाकों में रहते हुए गुजरा था।
उस समय उनकी पहचान मुख्य रूप से संगठनात्मक कार्यकर्ता की थी। चुनावी गतिविधियों में सक्रिय रहने के बावजूद उन्होंने खुद कभी चुनाव नहीं लड़ा था। उन्होंने कहा कि यदि उनका उद्देश्य चुनावी राजनीति में आगे बढ़ना होता, तो वह पहले ही चुनाव लड़ सकते थे।
निजी लक्ष्य से ज्यादा देश के लिए काम करने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने जीवन में यह तय करने के लिए कभी ज्यादा विचार नहीं किया कि उन्हें आगे क्या बनना है। बचपन से मिले संस्कारों ने उन्हें उद्देश्य के साथ जीवन जीने और निजी महत्वाकांक्षा के बजाय देश के लिए काम करने की सीख दी।
उनका कहना था कि जीवन में जो जिम्मेदारी मिली, उसे निभाते हुए वह आगे बढ़ते रहे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “मेरे लिए कर्म ही सब कुछ है, कर्म ही मेरा धर्म है।”
प्रधानमंत्री ने युवाओं से भी देश के लिए इसी भावना के साथ काम करने और उनके सामने मौजूद अवसर का पूरी क्षमता के साथ उपयोग करने की अपील की।
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