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PM In Kedarnath Dham : प्रधानमंत्री बोले - 'देव भूमि पर विकास के काम भगवान शंकर की सहज कृपा का ही परिणाम'

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केदारनाथ धाम पहुंचे पीएम मोदी

केदारनाथ धाम पहुंचे पीएम मोदी

News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
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PM Modi Visit Kedarnath : भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) पहुंचे है। मंदिर पहुंच पीएम ने बाबा केदारनाथ की पूजा अर्चना की। उनके साथ उत्तराखंड के राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (Retired Lt. Gen. Gurmeet Singh) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhaami) भी मौजूद रहे। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एमआई हेलीकॉप्टर (MI Helicopter) से सुबह 7:55 पर केदारनाथ दाम पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 15 मिनट तक विशेष पूजा अर्चना कर जलाभिषेक किया। जसके बाद उन्होंने मंदिर का परिक्रमा लगाया। बाबा केदारनाथ के दर्शन के बाद पीएम ने श्री आदि शंकराचार्य जी की 12 फिट लंबी और 35 टन वजनी मूर्ति का अनावरण किया। कुछ देर के लिए प्रधानमंत्री यहां धयन पर बैठे। पीएम ने केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्याें का जायजा भी लिया और कुछ पुनर्निर्माण कार्याें शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। 

पीएम का हिमालय और उत्तराखंड से विशेष लगाव : सीएम धामी
प्रधानमंत्री को सीएम धामी ने केदारनाथ मंदिर का प्रतिकात्मक स्वरूप और शॉल भेंट किया। जिसके बाद पीएम ने यहां से जनसभा को संबोधित किया। पीएम के पहले मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित किया और पीएम का केदारनाथ पहुंचने पर हार्दिक स्वागत किया। धामी ने कहा आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। पीएम का उत्तराखंड और हिमालय से विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए धामी ने कहा पीएम के नेतृत्व ने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का संचार हो रहा है।

प्रधानमंत्री का सम्बोधन :
'जय बाबा केदार' के जयकारे के साथ शुरू किया संबोधन
अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री ने 'जय बाबा केदार' के जयकारों के साथ की। उन्होंने कहा - आज सभी मठों, 12 ज्योतिर्लिंगों, अनेक शिवालयों, शक्ति धाम,अनेक तीर्थ क्षेत्रों पर देश के गणमान्य महापुरुष, पूज्य शंकराचार्य परंपरा से जुड़े हुए सभी वरिष्ठ ऋषि, मनीषी और अनेक श्रद्धालु भी देश के हर कोने से केदारनाथ की इस पवित्र भूमि के साथ हमें आशीर्वाद दे रहे हैं। आप सभी आदि शंकराचार्य जी की समाधि की पुनर्स्थापना के साक्षी बन रहे हैं। ये भारत की आध्यात्मिक समृद्धि और व्यापकता का बहुत अलौकिक दृश्य है। हमारे उपनिषदों में, आदि शंकराचार्य जी की रचनाओं में कई जगह नेति-नेति कहकर एक भाव विश्व का विस्तार दिया गया है। रामचरित मानस को भी हम देखें तो इसमें में अलग तरीके से ये भाव दोहराया गया है। रामचरित मानस में कहा गया है- ‘अबिगत अकथ अपार, नेति-नेति नित निगम कह’ अर्थात्, कुछ अनुभव इतने अलौकिक, इतने अनंत होते हैं कि उन्हें शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता। बाबा केदारनाथ की शरण में आकर मेरी अनुभूति ऐसी ही होती है।

उत्तराखंड सरकार का धन्यवाद
पीएम ने कहा - बरसों पहले जो नुकसान यहां हुआ था, वो अकल्पनीय था। जो लोग यहां आते थे, वो सोचते थे कि क्या ये हमारा केदार धाम फिर से उठ खड़ा होगा? लेकिन मेरे भीतर की आवाज कह रही थी की ये पहले से अधिक आन-बान-शान के साथ खड़ा होगा। इस आदि भूमि पर शाश्वत के साथ आधुनिकता का ये मेल, विकास के ये काम भगवान शंकर की सहज कृपा का ही परिणाम हैं। मैं इन पुनीत प्रयासों के लिए उत्तराखंड सरकार का, मुख्यमंत्री धामी जी का, और इन कामों की ज़िम्मेदारी उठाने वाले सभी लोगों का भी धन्यवाद करता हूँ।

शंकराचार्य जी ने समाज को सत्य से परिचित करवाया
प्रधानमंत्री ने कहा - शंकर का संस्कृत में अर्थ है- “शं करोति सः शंकरः” यानी, जो कल्याण करे, वही शंकर है। इस व्याकरण को भी आचार्य शंकर ने प्रत्यक्ष प्रमाणित कर दिया। उनका पूरा जीवन जितना असाधारण था, उतना ही वो जन-साधारण के कल्याण के लिए समर्पित थे। एक समय था जब आध्यात्म को, धर्म को केवल रूढ़ियों से जोड़कर देखा जाने लगा था। लेकिन, भारतीय दर्शन तो मानव कल्याण की बात करता है, जीवन को पूर्णता के साथ, holistic way में देखता है। आदि शंकराचार्य जी ने समाज को इस सत्य से परिचित कराने का काम किया। आदि शंकराचार्य जी पवित्र मठों की स्थापना की, चार धामों की स्थापना की, द्वादश ज्योतिर्लिंगों का पुनर्जागरण का काम किया। आदि शंकराचार्य जी सबकुछ त्यागकर देश, समाज और मानवता के लिए जीने वालों के लिए एक सशक्त परंपरा खड़ी की।

सदियों से चारधाम यात्रा का रहा है महत्व 
हमारे यहां सदियों से चारधाम यात्रा का महत्व रहा है, द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन की, शक्तिपीठों के दर्शन की, अष्टविनायक जी के दर्शन की, ये सारी यात्राओं की परंपरा, ये तीर्थाटन हमारे यहां जीवन काल का हिस्सा माना गया है। अब हमारी सांस्कृतिक विरासतों को, आस्था के केन्द्रों को उसी गौरवभाव से देखा जा रहा है, जैसा देखा जाना चाहिए। आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर पूरे गौरव के साथ बन रहा है, अयोध्या को उसका गौरव वापस मिल रहा है। अभी दो दिन पहले ही अयोध्या में दीपोत्सव का भव्य आयोजन पूरी दुनिया ने देखा।

काशी का भी इसी तरह कल्याण हो रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा - भारत का प्राचीन सांस्कृतिक स्वरूप कैसा रहा होगा, आज हम इसकी कल्पना कर सकते हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश में काशी का भी कायाकल्प हो रहा है। विश्वनाथ धाम का कार्य बहुत तेज गति से पूर्णता की तरफ आगे बढ़ रहा है। अब देश अपने लिए बड़े लक्ष्य तय करता है, कठिन समय सीमाएं निर्धारित करता है, तो कुछ लोग कहते हैं कि - इतने कम समय में ये सब कैसे होगा! होगा भी या नहीं होगा! तब मैं कहता हूँ कि - समय के दायरे में बंधकर भयभीत होना अब भारत को मंजूर नहीं है।

चारों धाम हाइवेज से जुड़ रहे
पीएम ने कहा - चारधाम सड़क परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है, चारों धाम हाइवेज से जुड़ रहे हैं। भविष्य में यहां केदारनाथ जी तक श्रद्धालु केबल कार के जरिए आ सकें, इससे जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यहां पास में ही पवित्र हेमकुंड साहिब जी भी हैं। हेमकुंड साहिब जी के दर्शन आसान हों, इसके लिए वहां भी रोप-वे बनाने की तैयारी है। उत्तराखंड ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जिस तरह का अनुशासन दिखाया, वो  भी बहुत सराहनीय है। भौगोलिक कठिनाइयों को पार कर आज उत्तराखंड ने, उत्तराखंड के लोगों ने 100 प्रतिशत सिंगल डोज़ का लक्ष्य हासिल कर लिया है। ये उत्तराखंड की ताकत है, सामर्थ्य है।

बतादें, प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद मोदी का यह 5वां केदारनाथ दौरा है। अपने पहले कार्यकाल में पीएम 4 बार केदारनाथ धाम आए थे, दूसरे कार्यकाल का यह उनका पहला दौर है।

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