
डेस्क रिपोर्टर
News World Deskनई दिल्ली, न्यूज़ वर्ल्ड डेस्क। प्रधानमंत्री मोदी नरेंद्र मोदी कल 5 नवंबर को केदारनाथ जाएंगे। लेकिन मोदी के दौरे से पहले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को केदारनाथ जाना पड़ा। इसकी वजह है वहां का पुरोहित समाज। दअरसल पुरोहित समाज ने प्रधानमंत्री के केदारनाथ दौरे का विरोध करने की चेतावनी दी थी। पुरोहित समाज प्रदेश के मंदिरों को सरकारी कब्जे में लेने के लिए बने चार धाम देवस्थानम बोर्ड से नाराज है। समाज पिछले चार महीनों से इसका विरोध कर रहा है। ऐसे में घबराए सीएम को पुरोहित समाज से बात करने के लिए जाना पड़ा।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीएम ने पुरोहित समाज को आश्वासन दिया है कि उनके हक में ही फैसला आएगा। उन्होंने देवास्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए प्रधानमंत्री से बात करने की बात पुरोहित समाज से कही है। बताया जा रहा है कि, बोर्ड 30 नवंबर तक भंग कर दिया जाएगा।
कब बना उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड और क्या है पुरोहितों की चिंता?
उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने 15 जनवरी 2020 में प्रदेश के केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मिला कर कुल 51 मंदिरों को सरकारी हाथों में लेने के लिए 'चार धाम देवस्थानम बोर्ड' का गठन किया था, जिसका मंदिर के पुरोहितों ने विरोध किया। पुरोहित समाज और साधु-संत एकजुट हो गए और इसे हिन्दुओं की आस्था में दखल बताया। इसको लेकर उत्तराखंड में पिछले सवा साल से आंदोलन जारी है।
400 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास करेंगे पीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 नवंबर को केदारनाथ पहुंच कर भगवान शिव के दर्शन करेंगे इसके साथ ही वो यहां श्री आदि शंकराचार्य जी की समाधि का उद्घाटन कर उनकी मूर्ति का अनावरण करेंगे। प्रधानमंत्री वहां 150 करोड़ रु. की लागत से शुरू होने वाले कई प्रोजेक्ट का शिलान्यास करेंगे। साथ ही वे उत्तराखंड में करीब 250 करोड़ रु. की लागत से बनकर तैयार हुए अलग-अलग बुनियादी ढांचों का भी उद्घाटन करेंगे। बता दें 6 नवंबर के बाद केदारनाथ मंदिर के कपाट भी बंद होने हैं।
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