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कविता : भारत मां के पुत्र लाडले, जय हो अटल बिहारी की

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कविता : भारत मां के पुत्र लाडले, जय हो अटल बिहारी की

कविता : भारत मां के पुत्र लाडले, जय हो अटल बिहारी की

News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
News World Desk

भारत मां के पुत्र लाडले।

जय भारतरत्न निशानी की।

विश्वपटल से गूंज आ रही।

जय हो अटल बिहारी की।


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सन चोविस, पच्चीस दिसंबर।

ईसामसीह_जन्मदिन अवसर।

अटलबिहारी जन्मे ग्वालियर।

पर,पितृभूमि यमुनस्थ बटेश्वर।

कृपा श्री बांके बिहारी की।

जय हो अटल बिहारी की।


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बाबा श्री श्यामलाल  पंडित थे। श्रीकृष्णबिहारी पिताजी कवि थे।

मा थी ईश्वरभक्त परम मृदुभाषी।

मिली अटल को मां से गुणराशि।

ऐसे वचपन की बलिहारी की।

जय हो अटल बिहारी की।


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अवधविहारी,सदाबिहारी।

प्रेमबिहारी  तीनो बड़े भाई।

विमला,कमला और उर्मिला।

तीनो,बहनें अटलबिहारी की।

पृष्ठभूमि ऐसी प्रेम पुजारी की।

जय हो अटल बिहारी की।


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ताजमहल, पर पहली रचना।

हिंदू तन मन,हिंदुत्व गुनगुना।

आजादी अभी अधूरी,लिखना।

न्यायनीति पर सदा ही चलना।

आरती भीष्म प्रतिज्ञाधारी की।

जय हो अटल बिहारी की।


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ग्वालियर कानपुर उच्च पढ़ाई।

विधि की शिक्षा पितासंग पाई।

पं.दीनदयाल की संगत सुखदाई।

श्री गोलवलकर ने सुराह दिखाई।

रही परमकृपा त्रिपुरारी की।

जय हो अटल बिहारी की।


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राष्ट्रधर्म, पांचजन्य व चेतना।

सस्वदेश सब संपादित करना।

आरएसएस के रहे बडे़ प्रचारक।

फिर जनसंघ का अध्यक्ष बनना।

सतत कृपा राधाविहारी की।

जय हो अटल बिहारी की।


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वी जे पी की ,स्थापना करना।

विश्वमंच पर हिंदी में गरजना।

तीनबार चुने गए प्रधानमंत्री।

घुमाया विश्व मैं झंडा तिरंगी।

धन्य विजय, सदाचारी की।

जय हो अटल बिहार्री की।


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कारगिल से बने सेनानायक। 

स्वर्ण चतुर्भुज से जननायक।

राजनीति रक्षित की,ले सायक।

प्रेम जगत के विश्व विधायक।

बात"अलग" धूनि न्यारी की।

जय हो अटल बिहारी की।

                 

 रचयिता

डॉ. एस. के. मिश्र "अलग"

एम.ए (हिंदी,संस्कृत.अंग्रजी.दर्शनशास्त्र.समाज शास्त्र) एलएल.बी पी.एचडी

इस कविता के रचयिता को श्री दीनदयालजी एवं श्री पर शोध कार्य हेतु पीएच.डी. अवार्ड हुई है।

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