
नई दिल्ली। राज्यों में बुनियादी सुविधावों को लेकर राज्य सरकारें पूरी तरह से सजग नहीं हैं। केंद्र जो पैसा राज्य के विकास के लिए आवंटित करता है। उस राशि का राज्य सरकार कुछ हिस्सा ही खर्च कर पाती हैं। ये खुलासा हुआ है बैंक ऑफ बड़ौदा की सालाना रिपोर्ट में, रिपोर्ट का कहना है वर्ष 2023-24 में राज्यों ने कुल राशि का 45 फीसदी ही खर्च किया है।
केंद्र की तरफ से राज्यों को 7 लाख करोड़ रुपए पूंजिगत व्यय के लिए आवंटित किये थे, जिसमें से केवल 3.14 लाख करोड़ यानी 45% ही खर्च किए गये हैं।
18 राज्यों के उपलब्ध आंकड़ों में 65.6 फीसदी यानी 1.25 लाख करोड़ बांटा जा चुका है।
इनमें 40 फीसदी से कम खर्च करने वाले राज्यों में कर्नाटक (30.8%) और उत्तराखंड (35.3%), है जबकी तेलंगाना और मध्य प्रदेश इसमें काफी आगे, और पंजाब छत्तीसगढ़ पीछे हैं ।
बुनियादी सुविधाओं पर कितना खर्च करते हैं राज्य
मिजोरम (27%), सिक्किम (49.8%), हिमाचल (49.7%), मेघालय (48.7%), राजस्थान (46.8%), असम (46.5%), ओडिशा (44.0%), झारखंड (41.2%) और बंगाल (41.0%),तेलंगाना 78.3%, हरियाणा 68.6%,मध्य प्रदेश 65.6%,बिहार 60.5%,आंध्र प्रदेश 58.2%,केरल 57.1%
तमिलनाडु 50.3%,पंजाब 25.4%,छत्तीसगढ़ 26.7%,महाराष्ट्र 30.9%,उत्तर प्रदेश 37.8%
गुजरात 39.6%
आपको बता दें, पूंजिगत व्यय वो राशि है जिसे बुनियादी ढाँचे, भवन, मशीनरी और उपकरण जैसी भौतिक संपत्तियों के अधिग्रहण, निर्माण या सुधार के लिये खर्च किया जाता है। इसे उत्पादक और विकास बढ़ाने वाला माना जाता है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता को बढ़ाता है और भविष्य में आय एवं रोज़गार उत्पन्न करता है।
इस योजना का उद्देश्य राज्य के हिस्से को पूरा करने के लिये धन प्रदान करके जल-जीवन मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे प्रमुख क्षेत्रों में परियोजनाओं की गति को बढ़ाना भी है। यह योजना शहरों में जीवन की गुणवत्ता और शासन में सुधार के लिये राज्यों को शहरी नियोज़न और शहरी वित्त में सुधार करने के लिये प्रोत्साहित करने का भी प्रयास करती है। भारत सरकार अपने वार्षिक बजट के माध्यम से पूंजीगत व्यय आवंटित करती है, जिसे वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।
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