
नई दिल्ली। प्रयागराज के महाकुंभ 2025 में सोमवार (10 फरवरी) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई और सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। यह पल ऐतिहासिक बन गया, क्योंकि राष्ट्रपति मुर्मू देश की दूसरी राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाई। इससे पहले 1954 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संगम स्नान किया था।
राष्ट्रपति का यह दौरा करीब 8 घंटे का रहा, जिसमें उन्होंने विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ रहे।
अक्षयवट और लेटे हनुमान मंदिर के किए दर्शन
संगम स्नान के बाद राष्ट्रपति अक्षयवट मंदिर और लेटे हनुमान मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था कड़ी कर दी थी।
ऐसा रहा राष्ट्रपति का महाकुंभ यात्रा मार्ग
➡️ सुबह 9 बजे: राष्ट्रपति दिल्ली से विशेष विमान से प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पहुंचीं।
➡️ हेलिकॉप्टर से अरैल क्षेत्र: एयरपोर्ट से सीधे हेलिकॉप्टर के जरिए महाकुंभ नगर (अरैल क्षेत्र) में उतरीं।
➡️ क्रूज से संगम यात्रा: राष्ट्रपति कार से वीवीआईपी जेटी पहुंचीं और निषादराज क्रूज के जरिए संगम तक का सफर तय किया।
➡️ संगम स्नान और गंगा पूजन: डुबकी लगाने के बाद गंगा पूजन और आरती की।
➡️ डिजिटल महाकुंभ अनुभव केंद्र का अवलोकन: स्नान और दर्शन के बाद डिजिटल महाकुंभ केंद्र का दौरा किया।
➡️ शाम 4 बजे: राष्ट्रपति दिल्ली के लिए रवाना हुईं।
राष्ट्रपति का यह दौरा क्यों है ऐतिहासिक?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक और विशेष माना जा रहा है। 71 साल बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति ने कुंभ में स्नान किया है। इससे पहले यह गौरव डॉ. राजेंद्र प्रसाद को प्राप्त था।
राष्ट्रपति की यह धार्मिक यात्रा देशभर के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रेरणा बन गई है, जिससे महाकुंभ की आस्था और भव्यता और भी ज्यादा बढ़ गई है।
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