
डेस्क रिपोर्टर
News World Deskदिल्ली, न्यूज वर्ल्ड डेस्क। भारतीय रेलवे में ट्रेन चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गार्डों को अब ट्रेन मैनेजर के नाम से जाना जाएगा। रेल मंत्रालय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। गार्ड के जगह अब ट्रेन मैनेजर शब्द लिखा जाएगा।
इस सम्मान के लिए 168 वर्ष तक संघर्ष करना पड़ा
इस पदनाम से मुक्ति के लिए रेल कर्मियों को 168 साल तक संघर्ष करना पड़ा। दरअसल 1853 में मुंबई से थाणे के बीच पहली ट्रेन सेवा शुरु हुई थी। तभी अंग्रेजी हुकूमत ने ट्रेन गार्ड पदनाम दिया था। ट्रेन के पिछले डिब्बे में झंडी दिखाने वाले रेल कर्मी को ट्रेन गार्ड नाम से पुकारा जाता था। ये वहीं रेल कर्मी होते हैं जिन पर ट्रेन में बैठे हजारों रेल यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। ये रेल गार्ड पदनाम से लंबे समय से खफा थे और इस नाम को हटाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे। कुछ समय से इनका ये विरोध तेज हो गया था। इसके बाद कुछ समय पहले रेलवे के अधिकारियों ने ये माना कि यह पदनाम रेलकर्मियों के कर्तव्यों और मान सम्मान के विपरीत है इसे बदला जाना चाहिए।
इनके पदनाम भी बदलेंगे
रेलवे ने ट्रेन गार्ड पदनाम को बदलकर ट्रेन मैनेजर या कहें ट्रेन प्रबंधक कर दिया है। इसके अलावा चार अन्य पदनाम भी है जिनको बदला गया है । जिसके तहत अब सहायक गार्ड को सहायक यात्री ट्रेन मैनेजर, गुड्स गार्ड को गुड्स ट्रेन मैनेजर, वरिष्ठ गुड्स गार्ड को वरिष्ठ गुड्स ट्रेन मैनेजर और वरिष्ठ यात्री गार्ड को वरिष्ठ ट्रेन प्रबंधक कहा जाएगा।
रेलवे ने जारी किये आदेश
पदनाम बदले जाने को लेकर रेलवे बोर्ड ने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिए हैं। रेलवे ने तत्काल गार्ड के स्थान पर ट्रेन मैनेजर का उपयोग करने का निर्णय लिया है। हालांकि पदनाम के संशोधन में उनके वेतन स्तर, भर्ती की प्रक्रिया,मौजूदा कर्तव्यों व जिम्मेदारियों, वरिष्ठता और पदन्नोति को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। अब जोन स्तर पर इसमें आगे की कार्यवाही की जायेगी।
भोपाल में भी रेल कर्मियों के पदनाम बदलेंगे
रेलवे के इस आदेश के बाद भोपाल रेल मंडल में भी 485 रेल कर्मियों का पदनाम बदलेंगे।
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