
अयोध्या में रामनवमी पर एक बार फिर अद्भुत नजारा देखने को मिला। दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक हुआ—और यह पल देखने के लिए करीब 10 लाख श्रद्धालु उमड़ पड़े। आस्था और विज्ञान का यह संगम हर किसी को भावुक कर गया…
9 मिनट तक ललाट पर पड़ी सूर्य की किरणें
अभिजीत मुहूर्त में ठीक दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ीं। करीब 9 मिनट तक यह दिव्य दृश्य चलता रहा, जिसे देखने के लिए देशभर की निगाहें अयोध्या पर टिकी थीं। सूर्य तिलक होते ही भगवान राम के जन्म का प्रतीकात्मक क्षण पूरा हुआ और मंदिर परिसर में जयकारों की गूंज बढ़ गई…
विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम
इस सूर्य तिलक के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया। करीब 65 फीट लंबा सिस्टम तैयार किया गया, जिसमें अष्टधातु के 20 पाइप, 4 लेंस और 4 मिरर लगाए गए। इन्हीं के जरिए सूर्य की किरणों को गर्भगृह तक पहुंचाकर रामलला के ललाट पर केंद्रित किया गया—यह पूरी प्रक्रिया बेहद सटीक गणना से की गई थी…
गर्भगृह में विशेष पूजा, 56 भोग का आयोजन
सूर्य तिलक के दौरान गर्भगृह में 14 पुजारी मौजूद रहे, जिन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद भव्य आरती हुई। तिलक के बाद रामलला के पट कुछ समय के लिए बंद किए गए और अब भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन (छप्पन भोग) अर्पित किए जाएंगे…
सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक दर्शन
रामनवमी के मौके पर भक्तों के लिए दर्शन समय बढ़ा दिया गया। अब सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक यानी कुल 18 घंटे दर्शन हो रहे हैं। पहले यह समय करीब 15 घंटे का था, लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए इसे बढ़ाया गया…
अयोध्या में उमड़ा आस्था का सैलाब
आज अयोध्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब देखने को मिला। करीब 10 लाख लोग रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी कतारें लगी रहीं। हर तरफ सिर्फ भक्ति, उत्साह और जय श्रीराम के नारे गूंजते रहे…
क्यों खास है सूर्य तिलक?
प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह रामलला का दूसरा सूर्य तिलक है। इसे भगवान राम के जन्म क्षण से जोड़कर देखा जाता है, जब सूर्यवंशी परंपरा का प्रतीक सूर्य स्वयं तिलक करता है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और इंजीनियरिंग का भी शानदार उदाहरण बन गया है।
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