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मुंबई में दर्शन के लिए रखी गई रतन टाटा की पार्थिव देह, राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार

10 अक्टू, 20240 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मुंबई में दर्शन के लिए रखी गई रतन टाटा की पार्थिव देह, राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार

मुंबई में दर्शन के लिए रखी गई रतन टाटा की पार्थिव देह, राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मुंबई। भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज और पूर्व टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा (86) का बुधवार देर रात मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। गुरुवार सुबह से उन्हें पूरे राज्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रतन टाटा के सम्मान में गुरुवार को राज्य में एक दिन का शोक घोषित किया है और इस अवसर पर महाराष्ट्र में सभी सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।

गृह मंत्री अमित शाह अंतिम संस्कार में होंगे शामिल
रतन टाटा की पार्थिव देह मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA) में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रखा जाएगी, जहां लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकते हैं। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार वर्ली में किया जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह अंतिम संस्कार में शामिल होंगे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आसियान-भारत और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलनों में भाग लेने के लिए लाओस गए हैं।

रतन टाटा ने जिया हमेशा सादगीपूर्ण जीवन
रतन टाटा के निधन से भारतीय व्यापार जगत में एक युग का अंत हो गया। उन्होंने न केवल टाटा समूह को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया, बल्कि अपने सादगी भरे जीवन और उच्च नैतिक मूल्यों के लिए भी प्रसिद्ध थे। हालांकि वे 100 से अधिक देशों में 30 से अधिक कंपनियों का संचालन करते थे, रतन टाटा ने हमेशा एक साधारण और सादगीपूर्ण जीवन जिया। उन्होंने कभी अरबपतियों की सूची में जगह नहीं बनाई, लेकिन उनकी सच्चाई, विनम्रता और ईमानदारी ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाया।

28 दिसंबर 1937 को मुंबई में जन्मे थे रतन टाटा

  • रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था। वे भारत के सबसे प्रतिष्ठित व्यावसायिक परिवारों में से एक से ताल्लुक रखते थे। उनके परदादा जमशेदजी टाटा ने 1868 में एक छोटी ट्रेडिंग कंपनी के रूप में टाटा समूह की नींव रखी थी, जो आगे चलकर स्टील, ऑटोमोबाइल, सॉफ्टवेयर और एयरलाइंस जैसे कई क्षेत्रों में फैल गई। 

  • रतन टाटा का बचपन उनके परिवारिक विशेषाधिकार और कठिनाइयों के बीच बीता। उनके माता-पिता के अलग हो जाने के बाद उनका पालन-पोषण उनकी दादी लेडी नवाजबाई टाटा ने किया। उन्होंने मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से पढ़ाई की और फिर उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए। उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर में बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। 

  • रतन टाटा ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम भी पूरा किया, लेकिन आर्किटेक्ट बनने का सपना पीछे छूट गया जब वे 1960 के दशक की शुरुआत में फैमिली बिजनेस संभालने के लिए भारत लौटे। उनके करियर की शुरुआत टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट के शॉप फ्लोर से हुई थी, और यह जमीनी अनुभव उनके नेतृत्व के स्टाइल को हमेशा परिभाषित करता रहा।

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