रविवार, 03 मई 2026
Logo
National

राजद्रोह कानून खत्म होगा, इसकी जगह अब क्या? आसान शब्दों में समझिए नए कानून का ट्विस्ट

अभी-अभी0 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
राजद्रोह कानून खत्म होगा, इसकी जगह अब क्या? आसान शब्दों में समझिए नए कानून का ट्विस्ट

राजद्रोह कानून खत्म होगा, इसकी जगह अब क्या? आसान शब्दों में समझिए नए कानून का ट्विस्ट

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। अब भारत में ही रहकर देश के खिलाफ टिप्पणी करने वालों की खैर नहीं होगी। भारत सरकार ने राजद्रोह कानून को खत्म करके इसे देशद्रोह के रूप में प्रस्तुत किया है। इस कानून के आने के बाद अब देश के खिलाफ जहर उगलने वालों की खैर नहीं होगी। नए कानून के मुताबिक अब देश के खिलाफ मौखिक, सांकेतिक या लिखित टिप्पणी करना भी देशद्रोह की श्रेणी में आएगा और ऐसे व्यक्ति को उम्रकैद की सजा हो सकती है।


दरअसल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) विधेयक, 2023 के नए कानून में राजद्रोह को अब नए रूप में प्रस्तावित किया गया है। इसके साथ ही मोदी सरकार ने राजद्रोह का नाम बदलकर देशद्रोह कर दिया है। यह राजद्रोह के कानून से बिलकुल अलग है। जो कोई भी व्यक्ति जानबूझकर अपने शब्दों, संकेतों, इलेक्ट्रॉनिक संचार या वित्तीय साधनों का इस्तेमाल करके उकसाने या लोगों को उत्तेजित करने का प्रयास करता है या भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालता है; या ऐसे किसी भी कार्य में शामिल होता है या उसे करता है तो उसको न्यूनतम 7 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।


क्या है राजद्रोह कानून?

बता दें कि राजद्रोह कानून जिसे आईपीसी की धारा 124ए के नाम से जाना जाता है, उसके मुताबिक अगर कोई शख्स शब्दों, संकेतों के माध्यम से घृणा या फैलाने का प्रयास करता है तो उसे आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। इसके अलावा दोषी पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।


​नए कानून में क्या होगा​

- प्रस्तावित कानून के सेक्शन 150 में अब भी देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के खिलाफ काम करने वाले अलगाववादियों, सशस्त्र विद्रोह और विध्वंसक गतिविधियों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है।

- प्रस्ताव में सरकार की आलोचना और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का देश के खिलाफ विध्वंसक, अलगाववादी और सशस्त्र विद्रोह वाली गतिविधियों से अंतर स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।

- एक अधिकारी ने TOI को बताया कि नए कानून को 'देशद्रोह' (Treason) के तौर पर जाना जाएगा, राजद्रोह नहीं जो ब्रिटिश क्राउन से संबंधित है।

- अभी सिडिशन कानून के तहत अपराध में तीन साल तक की जेल से लेकर आजीवन कारावास का प्रावधान है। इसमें जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

- नए प्रस्तावित कानून में दोषियों को उम्रकैद या सात साल तक की जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है।

- विधेयक के अनुसार, जो कोई भी स्टेट के खिलाफ युद्ध छेड़ने या युद्ध छेड़ने के इरादे से व्यक्तियों को एकत्र करता है, हथियार या गोला-बारूद इकट्ठा करता है या युद्ध छेड़ने की तैयारी करता है, उसे न्यूनतम 10 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा होगी और उसे जुर्माना भी देना होगा।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें