
नई दिल्ली। भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink की लॉन्चिंग में देरी का मामला अब कारोबार से निकलकर सियासी बहस का विषय बन गया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि उन्हें भारतीय उद्यमियों से ज्यादा चिंता विदेशी कारोबारियों की क्यों है।
शिवराज ने अपनी बात रखने के लिए हिंदी फिल्म आंखें के मशहूर गीत 'गैरों पे करम, अपनों पे सितम' की पंक्ति का इस्तेमाल किया। उनका यह तंज राहुल गांधी की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने Starlink विवाद पर एलन मस्क का समर्थन करते हुए भारत की कारोबारी व्यवस्था पर कटाक्ष किया था।
शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी से क्या कहा?
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा कि देश के उद्यमियों की तुलना में राहुल को विदेशियों की अधिक चिंता सता रही है।
शिवराज ने अपने संदेश में कहा:
«अपनों पे सितम, गैरों पे करम!
राहुल जी, आँखों पर कैसी पट्टी बाँध ली है आपने कि देशहित ही दिखाई देना बंद हो गया?
देश के उद्यमियों से ज़्यादा चिंता आपको विदेशियों की सताने लगी है।»
उनकी टिप्पणी को एलन मस्क और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी से जुड़े विवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस मामले में राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी थी, जिसके बाद भारतीय कारोबारियों और विदेशी कंपनियों के लिए समान अवसरों का सवाल राजनीतिक बहस में शामिल हो गया।
एलन मस्क ने पूछा था- क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?
विवाद की शुरुआत Starlink की भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया में देरी को लेकर मस्क की नाराजगी से हुई। SpaceX के प्रमुख मस्क ने 8 अक्टूबर 2026 को X पर सवाल उठाया कि उनकी कंपनी 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त होने और भारत सरकार की आवश्यकताओं का पालन करने के लिए पांच साल तक काम करने के बावजूद सेवा शुरू क्यों नहीं कर पा रही है।
मस्क ने अपनी पोस्ट में पूछा, 'क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?' उनका इशारा रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी की ओर था।
इससे पहले 7 अक्टूबर को मस्क ने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी Starlink को भारतीय बाजार में प्रवेश करने से रोक रहे हैं, ताकि उनका एकाधिकार बना रहे। उन्होंने इसे भारतीय लोगों के हितों के खिलाफ बताया था। हालांकि, मस्क ने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।
राहुल गांधी ने मस्क को दिया जवाब, फिर आया पलटवार
मुकेश अंबानी को लेकर मस्क की टिप्पणी पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा:
«Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.»
इसका आशय था कि भारत में उनका स्वागत है, लेकिन उन्हें अभी एक और व्यक्ति के बारे में पता चलना बाकी है। राहुल ने उस व्यक्ति का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया। उनकी टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में गौतम अडानी की ओर इशारे के रूप में देखा गया, क्योंकि कांग्रेस पहले भी अडानी और केंद्र सरकार के संबंधों को लेकर सवाल उठाती रही है।
राहुल के संदेश पर मस्क ने जवाब दिया, 'Thank you, Rahul. This is indeed troubling.' यानी उन्होंने राहुल का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक है। यह बातचीत 8 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी।
मस्क ने 9 अक्टूबर को फिर अंबानी पर साधा निशाना
मामला यहीं नहीं रुका। 9 अक्टूबर को मस्क ने एक और पोस्ट कर विवाद को आगे बढ़ाया। इस बार उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में मुकेश अंबानी को 'Prime Minister Ambani' कहकर संबोधित किया और कहा कि उन्हें यह समझने के लिए माफी मांगनी चाहिए कि अंबानी भारत के असली बॉस हैं।
मस्क ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि बाजार में एकाधिकार बनाए रखने से भारतीय उपभोक्ताओं का नुकसान होता है। उन्होंने अंबानी से Starlink को प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देने की अपील भी की।
मस्क ने यह तर्क भी दिया कि भारत के कई क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच सीमित है। उनके मुताबिक, Starlink जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर और छोटे कारोबारियों को वैश्विक बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान संचार व्यवस्था बनाए रखने में Starlink की भूमिका का भी उल्लेख किया।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मस्क की ये टिप्पणियां उनके अपने आरोप और दावे हैं। इन्हें सरकार या संबंधित कंपनियों द्वारा प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
सरकार ने मस्क के आरोपों को किया खारिज
Starlink को लेकर उठे सवालों पर भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण नियामकीय व्यवस्था लागू है।
संचार मंत्रालय के अनुसार, Starlink के अलावा रिलायंस समूह की Jio Satcom और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb को भी संबंधित लाइसेंस दिए गए हैं। लेकिन लाइसेंस मिलना व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की अंतिम अनुमति नहीं है।
तीनों कंपनियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का पालन करना होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन कंपनियों की सुरक्षा जांच प्रक्रिया चल रही थी और सभी लगभग एक ही नियामकीय चरण में थीं।
सरकार ने उस दावे को भी खारिज किया कि Starlink के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उसके अनुसार, सुरक्षा संबंधी मंजूरी पूरी होने के बाद संबंधित कंपनी स्पेक्ट्रम आवंटन की अगली प्रक्रिया में आगे बढ़ सकती है।
इसका अर्थ है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर Starlink की सेवा शुरू होने में देरी को सीधे तौर पर किसी एक भारतीय कारोबारी द्वारा रुकवाया गया फैसला नहीं कहा जा सकता।
राहुल गांधी ने कारोबार में समान अवसर की बात भी उठाई
मस्क के साथ सोशल मीडिया पर बातचीत के अगले दिन, 9 अक्टूबर को राहुल गांधी ने कारोबार में समान अवसरों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें हर कारोबारी को प्रतिस्पर्धा करने का उचित अवसर मिले।
राहुल ने अपने संदेश में क्रोनी कैपिटलिज्म यानी राजनीतिक संरक्षण और कारोबारी हितों के गठजोड़ को खत्म करने की बात कही। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध कारोबार से नहीं, बल्कि एकाधिकार से है।
इस तरह राहुल गांधी की प्रतिक्रिया को केवल मस्क के समर्थन तक सीमित नहीं देखा जा सकता। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक व्यवस्था, प्रतिस्पर्धा और कारोबार में समान अवसरों की बहस से भी जोड़ा।
शिवराज के तंज से क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?
शिवराज सिंह चौहान की टिप्पणी का केंद्र राहुल गांधी का विदेशी कारोबारी की शिकायत पर प्रतिक्रिया देना है। उन्होंने इसे भारतीय उद्यमियों के हितों की तुलना में विदेशी कारोबारी की चिंता को अधिक महत्व देने के रूप में पेश किया।
इसके उलट, राहुल गांधी ने अपने रुख को एकाधिकार के विरोध और कारोबार में समान अवसर की मांग के तौर पर रखा है। मस्क ने भी Starlink को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर देने की मांग की है, जबकि सरकार ने सुरक्षा जांच और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया को जरूरी बताया है।
इस पूरे घटनाक्रम में तीन अलग-अलग पक्षों के तर्क सामने आए हैं—शिवराज का राजनीतिक हमला, राहुल गांधी का कारोबारी प्रतिस्पर्धा पर जोर और मस्क की बाजार में प्रवेश को लेकर शिकायत। सरकार का कहना है कि नियम सभी सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं पर समान रूप से लागू हैं।
अब इस विवाद का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Starlink की व्यावसायिक शुरुआत के लिए जरूरी सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया कब पूरी होती है। यही आगे तय करेगा कि कंपनी भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं कब शुरू कर पाएगी।
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