
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चे पर ही छुट्टी देने का नियम असंवैधानिक है।
सुप्रीम कोर्ट ने किस नियम को रद्द किया
जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 से जुड़े प्रावधानों की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने इस कानून की धारा 60(4) में मौजूद उस शर्त को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि गोद लेने वाली महिला को मातृत्व अवकाश तभी मिलेगा जब बच्चा 3 महीने से कम उम्र का हो। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान समानता के अधिकार के खिलाफ है।
कोर्ट ने क्यों माना इसे असंवैधानिक
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल शिशु जन्म नहीं बल्कि बच्चे और माता के बीच शुरुआती देखभाल और भावनात्मक संबंध को मजबूत करना है। ऐसे में गोद लेने वाले बच्चों की उम्र के आधार पर छुट्टी सीमित करना भेदभावपूर्ण है।
पितृत्व अवकाश पर भी कानून बनाने का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को भी कानूनी रूप से मान्यता देने पर विचार किया जाए। कोर्ट का कहना है कि बच्चे की देखभाल केवल मां की जिम्मेदारी नहीं होती और शुरुआती विकास में पिता की भूमिका भी उतनी ही अहम है।
याचिकाकर्ता का क्या तर्क था
इस मामले में हमसानंदिनी नंदूरी ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि, गोद लेने वाले बच्चों के लिए उम्र की सीमा तय करना भेदभावपूर्ण है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता के अधिकार) का उल्लंघन है। बच्चे की देखभाल दोनों माता-पिता की जिम्मेदारी है, इसलिए पितृत्व अवकाश भी जरूरी है।
इस मामले की पूरी टाइमलाइन
यह मामला कई वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था।
2017
हमसानंदिनी नंदूरी ने दो बच्चों को गोद लिया। एक बच्ची 4.5 साल की और एक बच्चा 2 साल का था। उम्र 3 महीने से अधिक होने के कारण उन्हें सिर्फ 6-6 हफ्ते की छुट्टी दी गई।
2021
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस नियम को चुनौती दी।
29 जनवरी 2025
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया।
21 नवंबर 2025
केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 लागू किया, जिसमें वही पुराना नियम शामिल रहा।
17 मार्च 2026
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 3 महीने की आयु सीमा को असंवैधानिक घोषित कर दिया।
भारत में अभी क्या है मातृत्व अवकाश का नियम
- भारत में महिलाओं को मातृत्व अवकाश का अधिकार पहले से दिया गया है।
- पहले दो बच्चों तक: 26 हफ्ते का वेतन सहित अवकाश
- दो से अधिक बच्चों पर: 12 हफ्ते का अवकाश
- इसमें से 8 हफ्ते डिलीवरी से पहले लिए जा सकते हैं
- हालांकि अभी तक पितृत्व अवकाश को कानून में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।
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