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तमिलनाडु चुनाव 2026: विजय की TVK संग कांग्रेस, DMK को बड़ा झटका— राजपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश

06 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
तमिलनाडु चुनाव 2026: विजय की TVK संग कांग्रेस, DMK को बड़ा झटका— राजपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी TVK ने चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन किया है, वहीं कांग्रेस ने DMK का साथ छोड़कर नई सरकार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा दिया है।


विजय की एंट्री ने बदला तमिलनाडु का राजनीतिक समीकरण

दशकों से तमिलनाडु की राजनीति DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस बार TVK की एंट्री ने पूरा समीकरण बदल दिया। तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत लीं, जिससे पार्टी सीधे सत्ता की दौड़ में आ गई।


कांग्रेस ने छोड़ा DMK का साथ

सबसे बड़ा राजनीतिक झटका तब लगा जब कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी DMK से दूरी बनाकर TVK के साथ सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। तमिलनाडु कांग्रेस प्रमुख के. सेल्वपेरुंथगई और प्रभारी गिरीश चोडंकर ने TVK मुख्यालय पहुंचकर विजय से मुलाकात की और गठबंधन पर सहमति जताई।


सरकार बनाने का गणित क्या कहता है?

तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का बहुमत जरूरी है। TVK के 108 और कांग्रेस के 5 विधायक मिलाकर आंकड़ा 113 तक पहुंचता है। यानी बहुमत से सिर्फ 5 सीटें दूर। यही वजह है कि अब TVK की नजर AIADMK पर टिक गई है।


AIADMK भी बन सकती है गेमचेंजर

रिपोर्ट्स के अनुसार, TVK अब AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के संपर्क में है। AIADMK ने इस चुनाव में 47 सीटें जीती हैं और अगर यह समर्थन मिलता है, तो तमिलनाडु में पूरी तरह नया सत्ता समीकरण बन सकता है।


कांग्रेस ने फैसले का किया बचाव

कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने DMK का साथ छोड़ने पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि राजनीति में गठबंधन स्थायी नहीं होते। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि गठबंधन बनना और टूटना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और यह फैसला राज्य के हित में लिया गया है।


2014 का उदाहरण देकर DMK को याद दिलाया पुराना फैसला

ज्योतिमणि ने याद दिलाया कि 2014 लोकसभा चुनाव से पहले DMK ने भी कांग्रेस को गठबंधन से बाहर कर दिया था। उन्होंने कहा कि तब कांग्रेस ने इसे सिर्फ एक राजनीतिक फैसला माना था और कोई कटुता नहीं दिखाई थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एम. के. स्टालिन पर निजी हमला करना कांग्रेस की संस्कृति नहीं है।


DMK ने कांग्रेस पर लगाया ‘धोखे’ का आरोप

कांग्रेस के इस कदम से DMK खेमे में भारी नाराजगी है। DMK नेता सरवनन अन्नादुरई ने इसे INDIA गठबंधन की “पीठ में छुरा घोंपना” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह फैसला दूरदर्शिता की कमी दिखाता है और इससे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।


तमिलनाडु की राजनीति नए दौर में?

थलापति विजय की सियासी एंट्री और कांग्रेस के इस बड़े फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।

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