रविवार, 30 अगस्त 2026
Logo
National

‘Teen in the Canteen’: किशोरों को समझाने से पहले उन्हें समझना जरूरी: पुनीत वशिष्ठ

30 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
‘Teen in the Canteen’: किशोरों को समझाने से पहले उन्हें समझना जरूरी: पुनीत वशिष्ठ
News World Desk
डेस्क रिपोर्टर
News World Desk

किशोरावस्था सवालों, सपनों, दोस्ती, रिश्तों और भावनात्मक उतार-चढ़ाव का दौर है। आज इस दुनिया पर मोबाइल और सोशल मीडिया का प्रभाव भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे समय में लेखक और शिक्षाविद् पुनीत वशिष्ठ की नई पुस्तक ‘Teen in the Canteen’ किशोरों की इसी दुनिया को उनकी अपनी भाषा और अंदाज में समझने की कोशिश करती है। हिंदी-अंग्रेजी के सहज मिश्रण में लिखी गई कहानियां स्कूल, घर और समाज में किशोरों के सामने आने वाली परिस्थितियों और उनके मन की उलझनों को सामने लाती हैं। पुस्तक और विद्यार्थियों में विकसित हो रही साहित्यिक संस्कृति को लेकर पुनीत वशिष्ठ से बातचीत के प्रमुख अंश-


सवाल: ‘Teen in the Canteen’ लिखने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

लेखक: किशोरों के पास कहने के लिए बहुत कुछ होता है, लेकिन उन्हें सुनने वाले कम होते हैं। उनकी दोस्ती, रिश्ते, भावनाएं, दबाव और असमंजस को अक्सर बड़े लोग छोटी बातें मान लेते हैं। मैं चाहता था कि किशोरों की अपनी दुनिया को उनकी ही भाषा में सामने लाया जाए।


सवाल: पुस्तक का नाम ‘Teen in the Canteen’ भी काफी दिलचस्प है।

लेखक: कैंटीन स्कूल की जिंदगी का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहां बच्चे पढ़ाई से अलग होकर दोस्ती करते हैं, बातें करते हैं, हंसते हैं और कई बार अपनी परेशानियां भी साझा करते हैं। कैंटीन मुझे किशोर मन की उस दुनिया का प्रतीक लगा, जहां उनकी असली बातचीत होती है।


सवाल: पुस्तक में हिंदी और अंग्रेजी का मिश्रण क्यों रखा गया है?

लेखक: आज के किशोर जिस तरह बातचीत करते हैं, पुस्तक की भाषा भी उसी के करीब है। वे सहज रूप से हिंदी और अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हैं। मेरा उद्देश्य भाषा को कठिन बनाना नहीं, बल्कि संवाद को स्वाभाविक बनाना था।


सवाल: क्या यह केवल किशोरों के लिए लिखी गई पुस्तक है?

लेखक: नहीं। किशोर इसमें खुद को देख सकते हैं, लेकिन माता-पिता और शिक्षक इसमें किशोरों को समझने की कोशिश कर सकते हैं। यह किताब एक पीढ़ी और दूसरी पीढ़ी के बीच संवाद का माध्यम बन सकती है।


सवाल: मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में बच्चों को किताबों से जोड़ना कितना मुश्किल है?

लेखक: चुनौती जरूर है, लेकिन समाधान भी हमारे पास है। हमें ऐसी किताबें लिखनी होंगी जिनमें बच्चों को अपनी दुनिया दिखाई दे। जब उन्हें लगेगा कि किताब उनके सवालों और अनुभवों की बात कर रही है तो वे उससे जुड़ेंगे।


सवाल: आप शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हैं। दोनों के बीच क्या संबंध देखते हैं?

लेखक: शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने का नाम नहीं है। साहित्य बच्चों को सोचने, महसूस करने और सवाल पूछने की क्षमता देता है। इसलिए शिक्षा और साहित्य मेरे लिए एक-दूसरे के पूरक हैं।


सवाल: आपके स्कूल में विद्यार्थियों की लेखन प्रतिभा को किस तरह प्रोत्साहित किया जा रहा है?

लेखक: हमने कोशिश की है कि बच्चे केवल पाठक न रहें, लेखक भी बनें। स्कूल में साहित्यिक गतिविधियों और रचनात्मक लेखन को लगातार प्रोत्साहित किया गया है। इसका परिणाम है कि अब तक 100 से अधिक विद्यार्थियों की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।


सवाल: आपके स्कूल के 100 से ज्यादा विद्यार्थियों का लेखक बनना क्या बताता है?

लेखक: यह बताता है कि बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है, उन्हें अवसर और प्रोत्साहन की जरूरत है। जब बच्चे को यह भरोसा मिलता है कि उसकी आवाज महत्वपूर्ण है, तो वह लिखना शुरू करता है। यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।


सवाल: ‘Teen in the Canteen’ का मूल संदेश क्या है?

लेखक: बहुत सरल संदेश है—किशोरों को केवल समझाने की जरूरत नहीं, उन्हें समझने की भी जरूरत है। उनके सवालों को सुनना और उनके साथ संवाद करना जरूरी है।


सवाल: आगे किन पुस्तकों पर काम चल रहा है?

लेखक: फिलहाल ‘Principal of Principles’ और ‘यात्रा’ पर काम चल रहा है। लेखन की यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी।


एक किताब से ज्यादा, संवाद की कोशिश

‘Teen in the Canteen’ किशोरों की दुनिया को दूर से देखने के बजाय उसके भीतर जाकर समझने का प्रयास है। स्कूल की कैंटीन से लेकर घर और समाज तक, यह पुस्तक उन भावनाओं और सवालों को आवाज देने की कोशिश करती है जिन्हें किशोर अक्सर अपने भीतर दबाए रखते हैं। पुनीत वशिष्ठ के लिए इस पुस्तक की सफलता यही होगी कि यह किसी किशोर और उसके माता-पिता, शिक्षक या समाज के बीच एक नया संवाद शुरू कर सके।


 (पुस्तक के लेखक पुनीत वशिष्ठ, जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल, आगरा के प्रधानाचार्य हैं)

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें