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भारत के आसमान पर ‘तेजस’ का कब्ज़ा! 2031 तक वायुसेना को मिलेगा देसी फाइटर जेट्स का सबसे बड़ा बेड़ा

19 सित, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
भारत के आसमान पर ‘तेजस’ का कब्ज़ा! 2031 तक वायुसेना को मिलेगा देसी फाइटर जेट्स का सबसे बड़ा बेड़ा

भारत के आसमान पर ‘तेजस’ का कब्ज़ा! 2031 तक वायुसेना को मिलेगा देसी फाइटर जेट्स का सबसे बड़ा बेड़ा

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

नई दिल्ली। भारत की ताकतवर वायुसेना अब पूरी तरह से स्वदेशी रंग में रंगने वाली है। दुश्मनों को आसमान में जवाब देने के लिए 4.5 पीढ़ी का अत्याधुनिक फाइटर जेट तेजस तैयार है। रक्षा मंत्रालय की 66,000 करोड़ रुपये की इस मेगा डील के बाद आने वाले कुछ ही सालों में भारत का आकाश विदेशी जेट्स के बजाय देसी तेजस की गरज से गूंजेगा। यह कदम न सिर्फ आत्मनिर्भर भारत मिशन की सबसे बड़ी छलांग है, बल्कि दुनिया को भारत की रक्षा क्षमता दिखाने का ऐतिहासिक मौका भी।


2031 तक तैयार होगा देश का सबसे बड़ा देसी जंगी बेड़ा

भारतीय वायुसेना ने 2031 तक 173 सिंगल सीटर तेजस MK1A फाइटर जेट और 47 डुअल सीटर ट्रेनर्स को शामिल करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। अगस्त 2025 में रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 97 अतिरिक्त तेजस Mk-1A फाइटर्स की मंजूरी दी। इस डील की कीमत लगभग 66,000 करोड़ रुपये आंकी गई है।

HAL पहले ही कह चुका है कि अक्टूबर से वायुसेना को पहले तेजस जेट्स की डिलीवरी शुरू कर दी जाएगी। इस तरह आने वाले छह सालों में भारत का आसमान पूरी तरह देसी फाइटर जेट्स से सज जाएगा।


कैसा है तेजस? हाई-टेक फीचर्स का कमाल

CNBCTV18.com की रिपोर्ट के मुताबिक, तेजस ट्विन सीटर हल्का, सभी मौसम में काम करने वाला मल्टीरोल 4.5 पीढ़ी का विमान है। HAL के अनुसार इसमें कई आधुनिक खूबियां शामिल हैं:

➡️ क्वाड्राप्लेक्स फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम

➡️ उन्नत ग्लास कॉकपिट और डिजिटल एवियोनिक्स सिस्टम

➡️ एयरफ्रेम के लिए एडवांस्ड कंपोजिट मैटीरियल

➡️ आरामदायक स्टैटिक-स्टेबिलिटी


ये सभी फीचर्स इसे दुनिया के सबसे खतरनाक और स्मार्ट फाइटर जेट्स की कतार में खड़ा कर देते हैं।


2026-27 तक 18 ट्विन सीटर जेट्स का वादा

2023 में HAL को भारतीय वायुसेना से 18 ट्विन सीटर जेट्स का ऑर्डर मिला था। कंपनी ने वादा किया है कि 2026-27 तक इनकी सप्लाई पूरी हो जाएगी। नए जंगी बेड़े में 11 स्क्वॉड्रन तैयार करने का लक्ष्य है, जिसमें हर स्क्वॉड्रन में लगभग 20 फाइटर जेट होंगे। इनमें चार ट्रेनर जेट भी शामिल होंगे। खास बात यह है कि ये सभी मैन-अनमैन टीमिंग (MUMT) ऑपरेशंस के लिए तैयार होंगे, जिसमें कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम का भी इस्तेमाल होगा।


एडवांस रडार से लैस, दुश्मन के रडार से गायब

HAL की योजना है कि 97 अतिरिक्त तेजस जेट्स में ELM-2052 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे (AESA) रडार या स्वदेशी उत्तम AESA रडार लगाए जाएंगे। यह रडार तकनीक तेजस को ऐसी ताकत देगा कि दुश्मन के रडार को चकमा देना बेहद आसान हो जाएगा।


हथियारों की टेस्टिंग—पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी कसौटी

HAL के चेयरमैन डी.के. सुनील ने न्यूज़8 से बातचीत में कहा, “तेजस में लगने वाले हथियारों का परीक्षण पूरे विमान सिस्टम की सबसे बड़ी कसौटी है। जब मिसाइल फायर होती है और लक्ष्य को भेदती है, तो इससे पूरे एयरक्राफ्ट सिस्टम का परफॉर्मेंस साबित होता है। यह टेस्ट इस बात को दिखाता है कि विमान के विंग पर लगे हथियार, उसकी एलाइनमेंट, सिग्नलिंग और एयरोडायनामिक असर सब सही काम कर रहे हैं। यही हमारे लिए टेस्टिंग का टॉप पॉइंट है।”


राफेल और F-35 पर कम होगी निर्भरता

तेजस के सफल ट्रायल के बाद भारतीय वायुसेना विदेशी फाइटर जेट्स जैसे राफेल, F-35 या सुखोई पर कम निर्भर रहेगी। अक्टूबर से ही पहले बैच की डिलीवरी शुरू होते ही भारत आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा।


पाकिस्तान-चीन का JF-17 थंडर बना मज़ाक

पाकिस्तान और चीन का संयुक्त प्रोजेक्ट JF-17 थंडर अब इतिहास बनता जा रहा है। यह चौथी पीढ़ी का हल्का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसका इस्तेमाल हवाई जासूसी और जमीन पर हमले के लिए किया जाता है। लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय वायुसेना की मिसाइलों ने JF-17 को धराशायी कर उसकी पोल खोल दी। अब 4.5 पीढ़ी का तेजस उस पर भारी साबित होगा और पाकिस्तान-चीन की संयुक्त ताकत को पीछे छोड़ देगा।


ASRAAM और अस्त्र मिसाइल—तेजस का अगला कदम

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ASRAAM और अस्त्र मिसाइल ट्रायल्स तेजस MK-1A की सफलता की अगली सीढ़ी साबित होंगे। जैसे ही ये ट्रायल्स पूरे होंगे, भारतीय वायुसेना को अक्टूबर से स्वदेशी जेट्स की डिलीवरी शुरू कर दी जाएगी।


आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान

यह परियोजना सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए नहीं, बल्कि देश की पूरी रक्षा क्षमता के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव है। देसी जेट्स का बेड़ा भारत को उन देशों की सूची में खड़ा करेगा, जो पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा करते हैं।

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